
रतलाम जिला अस्पताल प्रताड़ना मामला: रतलाम जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. एम.एस. सागर पर मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगा है। वरिष्ठ स्टाफ नर्स ने आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
रतलाम — जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. एम.एस. सागर पर मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप सामने आया है। अस्पताल की वरिष्ठ स्टाफ नर्स द्वारा एक लिखित शिकायत में कहा गया है कि सिविल सर्जन द्वारा कार्यस्थल पर बार-बार परेशान किया गया और व्यर्थ के कार्यों में उलझाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

पत्र में उल्लेख है कि सिविल सर्जन ने नर्स से जबरन पोस्टमार्टम कक्ष की ड्यूटी करवाई, जहां पर एक समय में दो मृतदेह और एक अर्धजली लाश रखी गई थी। नर्स के अनुसार, यह कार्य केवल मेल टेक्नीशियनों के लिए उपयुक्त होता है, ना कि नर्सिंग स्टाफ के लिए। इसके बावजूद उन्हें यह कार्य सौंपा गया, जो उनकी मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर डालता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि स्टाफ नर्स की मुख्य जिम्मेदारी मरीजों की देखभाल व ड्रेसिंग आदि की होती है, लेकिन उन्हें जानबूझकर ऐसे कार्यों में लगाया गया, जो उनके कर्तव्यों से संबंधित नहीं थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब वह अवकाश पर थीं, तब भी उन्हें जबरन नोटिस भेजकर ड्यूटी पर बुलाया गया, जो कि सेवा नियमों के विपरीत है।

वह 42 वर्षों से सेवाएं दे रही हैं और वरिष्ठ नर्सिंग स्टाफ में से एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना महामारी के समय में भी उन्हें निष्ठा से कार्य करने पर प्रशंसा पत्र मिला था। लेकिन अब उन्हें मानसिक रूप से कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
अंत में पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि दिनांक 4 जून 2025 को उन्हें तनावपूर्ण स्थिति में जबरन ओपीडी कार्य पर तैनात कर दिया गया, जबकि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और डॉक्टर ने उन्हें आराम की सलाह दी थी।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी भी कर्मचारी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न हो।
सिविल सर्जन डॉ. एम.एस. सागर का पक्ष
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. एम.एस. सागर ने आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला दो नर्सों के आपसी विवाद का था, जिसे सुलझाने के उद्देश्य से एक नर्सिंग ऑफिसर की सिविल ड्यूटी एमसीएच (मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केन्द्र) में लगाई गई थी।
डॉ. सागर के अनुसार, संबंधित नर्स ने ड्यूटी नहीं की और मेट्रन ने भी आदेश का पालन नहीं कराया, जिसके चलते मेट्रन की ड्यूटी भी सिविल से एमसीएच में स्थानांतरित कर दी गई। उनका कहना है कि इसी निर्णय से नाराज़ होकर 250 नर्सिंग ऑफिसर्स में से केवल 10–12 नर्सों ने मिलकर आरोप लगाए और एक ज्ञापन सौंपा है, जो तथ्यहीन है।
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