
विषय सूची
- क्या हुआ था एयरपोर्ट पर?
- यात्रियों का बयान
- एयरलाइन की प्रतिक्रिया
- जनता की प्रतिक्रिया और हंगामा
- निष्कर्ष

क्या हुआ था एयरपोर्ट पर?
शनिवार सुबह इंदौर एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई जब जबलपुर जाने वाली फ्लाइट को अचानक निरस्त कर दिया गया। यात्रियों को सुबह 6:55 बजे डिपार्चर के समय पर एयरपोर्ट पर बुलाया गया। सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद यात्रियों को बस में बैठाकर रनवे पर ले जाया गया, लेकिन विमान में चढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई।
करीब 50 से अधिक यात्रियों को बिना किसी सूचना के बस में डेढ़ घंटे तक बैठाए रखा गया। यात्रियों को वहां से साफ दिख रहा था कि विमान के पास कोई तकनीकी कार्य किया जा रहा है। लेकिन एयरलाइंस की तरफ से कोई अधिकारिक सूचना नहीं दी गई।
यात्रियों का बयान
यात्रियों में मौजूद डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि सुबह 7 बजे बोर्डिंग गेट ओपन किया गया और सभी को बस में बैठा दिया गया। बस रनवे पर करीब 90 मिनट तक खड़ी रही। सभी को उम्मीद थी कि जल्द फ्लाइट टेकऑफ करेगी, लेकिन विमान के गेट कभी खुले ही नहीं। अंततः 8:30 बजे उन्हें वापस अराइवल गेट पर लाया गया और जानकारी दी गई कि फ्लाइट निरस्त कर दी गई है।
एक अन्य यात्री डॉ. अभ्युदय वर्मा ने कहा कि शुरुआत में हमें बताया गया कि फ्लाइट केवल लेट है, लेकिन जब हमने पूछा कि कब तक फ्लाइट टेकऑफ करेगी, तो कोई सही जवाब नहीं मिला। बाद में 9 बजे बताया गया कि तकनीकी कारणों से फ्लाइट पूरी तरह से निरस्त कर दी गई है।
एयरलाइन की प्रतिक्रिया
एयरलाइन के स्टाफ की ओर से यात्रियों को बस यह बताया गया कि तकनीकी कारणों से फ्लाइट कैंसिल हुई है। जब यात्री अराइवल गेट पर पहुंचे तो वहां न तो कोई स्टाफ था और न ही किसी ने स्पष्ट जवाब दिया। यात्रियों ने जब स्टाफ से सवाल किए तो कहा गया- “अपना लगेज लो और चले जाओ।”
यात्रियों का आरोप है कि न तो पहले सूचना दी गई और न ही बाद में कोई विकल्प या रिफंड की स्पष्ट प्रक्रिया बताई गई। इससे उनकी यात्रा योजनाएं पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गईं।
जनता की प्रतिक्रिया और हंगामा
इस घटनाक्रम के बाद यात्रियों ने एयरपोर्ट पर जमकर हंगामा किया। कुछ यात्रियों ने एयरलाइन के खिलाफ सोशल मीडिया पर शिकायत दर्ज करने और उपभोक्ता फोरम में केस करने की बात कही।
घटना के समय मौजूद लोगों ने बताया कि यात्री काफी आक्रोशित थे क्योंकि किसी ने भी उन्हें समय रहते सूचना नहीं दी। यात्रियों में बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने फिलहाल मामले में कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया है।
इंदौर एयरपोर्ट की यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि एयरलाइंस की यात्री सेवा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। यात्रियों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था मिलनी चाहिए थी।
ऐसे मामलों से एयरलाइन कंपनियों की साख को भी नुकसान होता है। यह जरूरी है कि भविष्य में ऐसे हालात से बचने के लिए पारदर्शी और यात्री हितैषी नीति अपनाई जाए।
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