दीपिका की 8 घंटे शिफ्ट डिमांड ने बॉलीवुड को दो हिस्सों में बांटा। सैफ, मणिरत्नम समर्थन में, वांगा और ट्रोल्स विपक्ष में। क्या ये बदलाव की शुरुआत है?
क्या बॉलीवुड में काम के घंटे तय होने चाहिए? दीपिका पादुकोण विवाद से उठा सवाल
क्या वर्किंग ऑवर्स तय करना जरूरी हो गया है?
दीपिका पादुकोण ने फिल्म स्पिरिट के सेट पर सीमित कार्य घंटे की मांग रखी, जिससे उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया गया। यह घटनाक्रम सिर्फ एक एक्ट्रेस के हटाए जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा सामाजिक सवाल बन गया – क्या फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटे तय होने चाहिए?

बॉलीवुड से समर्थन और विरोध की मिली-जुली प्रतिक्रिया

🔹 समर्थन की आवाजें:
सैफ अली खान: “परिवार के साथ वक्त बिताना ही असली सफलता है।”
मणिरत्नम: “यह समझदारी और संवेदनशीलता की मांग है।”
राधिका आप्टे: “अब मैं ऐसे शूट्स नहीं कर सकती जो 15 घंटे से ज्यादा चलें।”
🔸 आलोचना और आरोप:
- संदीप रेड्डी वांगा: दीपिका पर स्क्रिप्ट लीक करने और PR गेम खेलने का आरोप।
- ट्रोल्स का रिएक्शन: सोशल मीडिया पर दीपिका को “अनप्रोफेशनल” बताया गया।
वर्क लाइफ बैलेंस बनाम प्रॉफेशनलिज़्
फिल्मी कलाकार अब सिर्फ किरदारों की तैयारी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इस नए रुझान को कुछ लोग “नखरा” मानते हैं, तो कुछ इसे “अधिकार”।
इंडस्ट्री में बदलाव की जरूरत
समय आ गया है कि बॉलीवुड भी इंटरनेशनल नॉर्म्स की तरह 8–10 घंटे की शिफ्ट और कॉन्ट्रैक्टुअल क्लॉज को अपनाए। इससे न सिर्फ काम की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि कलाकारों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा।
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