
भोपाल एम्स ऑपरेशन थिएटर पोस्टमॉर्टम के जरिए मेडिकल साइंस में एक नई मिसाल कायम हुई है। पहली बार ऑपरेशन थिएटर में ही ब्रेन डेड मरीज का पोस्टमॉर्टम किया गया। यह कदम अंगदान प्रक्रिया को तेज और सम्मानजनक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल मानी जा रही है।

60 वर्षीय शंकर लाल कुबरे, जो औबेदुल्लागंज के निवासी थे, ने अपने अंगों के जरिए तीन जिंदगियों को रोशन किया। परिवार चाहता था कि शव उन्हें सुबह 11 बजे तक सौंप दिया जाए ताकि अंतिम संस्कार सूर्यास्त से पहले हो सके। भोपाल एम्स ने इस मानवीय आग्रह को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

इस विशेष अवसर पर फॉरेंसिक टीम ऑपरेशन थिएटर में पहुंची और वहीं पर पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया को अंजाम दिया। अंग निकालने के बाद तुरंत पोस्टमॉर्टम शुरू हुआ, जिससे शव समय पर परिजनों को सौंपा जा सका।
इस प्रक्रिया का नेतृत्व किया डॉ. राघवेंद्र कुमार विदुआ की टीम ने। यह एम्स भोपाल का 11वां किडनी ट्रांसप्लांट और प्रदेश का दूसरा हार्ट ट्रांसप्लांट था।
नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) की रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2023 में केवल 8 कैडेवर डोनेशन हुए थे, जबकि तेलंगाना में 252। यह स्थिति दर्शाती है कि हमें और अधिक जागरूकता फैलाने की ज़रूरत है।
भोपाल एम्स ऑपरेशन थिएटर पोस्टमॉर्टम की यह पहल अंगदान की दिशा में एक बड़ी प्रेरणा बन सकती है।
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