
भोपाल। अब मध्यप्रदेश में शादी समारोह, धार्मिक आयोजन या राजनीतिक सभा के लिए पंडाल लगाने से पहले आयोजकों को फायर एनओसी (Fire NOC) लेना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार जल्द ही “फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट” लागू करने जा रही है, जिसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। यह एक्ट जून की कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा और मानसून सत्र में विधानसभा में पास करवाने की तैयारी है।

अब आयोजनों के लिए जरूरी होगी सुरक्षा मंजूरी
यदि कोई व्यक्ति शादी का पंडाल लगाता है या कोई संस्था सभा या सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करती है, तो आयोजन से पहले फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। इस नियम का पालन न करने पर आयोजकों को ₹10,000 तक जुर्माना और 3 महीने की जेल हो सकती है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठान और संस्थान भी आएंगे दायरे में
- 5,000 वर्गफुट या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले शैक्षणिक संस्थान, दुकानों, व्यावसायिक परिसरों, और औद्योगिक गोदामों को भी NOC लेना अनिवार्य होगा।
- नया कानून लागू होने के बाद नगर निगम और नगर पालिकाएं फायर टैक्स वसूलेंगी, जो प्रॉपर्टी टैक्स के साथ सरचार्ज के रूप में जोड़ा जाएगा।
शिवपुरी की आग ने खोली आंखें
12 अप्रैल को शिवपुरी जिले के ठाकुर बाबा मंदिर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दौरान पंडाल में गैस सिलेंडर बदलते समय भयानक आग लग गई थी, जिसमें हलवाई समेत तीन लोग झुलस गए थे। आयोजन स्थल पर आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
इस घटना ने फायर सेफ्टी के प्रति सरकारी उदासीनता को उजागर कर दिया, क्योंकि अभी तक प्रदेश में ऐसा कोई ठोस कानून नहीं है जिससे आयोजकों पर जिम्मेदारी तय की जा सके।
फायर सेफ्टी व्यवस्था होगी मजबूत
एक्ट की प्रमुख बातें:
- फायर एंड इमरजेंसी डायरेक्टोरेट का गठन होगा, जो पूरी अग्निशमन सेवा का संचालन करेगा।
- कमिश्नर और डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी जो अनुभवी होंगे और पूरी प्रणाली का मार्गदर्शन करेंगे।
- हर जिले और औद्योगिक क्षेत्र में फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिनका संचालन पुलिस थानों की तर्ज पर होगा।
- डिप्टी फायर ऑफिसर की नियुक्ति होगी जो स्टेशन प्रमुख होंगे और आपात स्थिति में कार्रवाई के लिए अधिकृत होंगे।
नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के अनुसार बदलाव
अब राज्य में हर नई और पुरानी बड़ी इमारत को फायर सेफ्टी उपकरणों की अनिवार्यता का पालन करना होगा। यदि भवन मालिक सुरक्षा उपकरण नहीं लगाते हैं, तो संबंधित अधिकारी उन्हें दंडित कर सकेंगे।
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