
शशि थरूर ने डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाक युद्धविराम के दावे को खारिज करते हुए राहुल गांधी की आलोचना पर भी परोक्ष रूप से जवाब दिया। जानिए कैसे उन्होंने कूटनीति से दोनों पर निशाना साधा।
2025 की मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सीमाई तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम कराने के दावे ने राजनीतिक हलकों में तहलका मचा दिया। खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसका उपयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करने के लिए किया। लेकिन इस बीच कांग्रेस के ही एक सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने इस विवाद को बेहद कूटनीतिक और परिपक्व तरीके से सुलझाया, जिसने ट्रंप के दावे और राहुल गांधी की आलोचना दोनों को ही चुनौती दी।

ट्रंप का युद्धविराम दावे पर भारत की सधी प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने मई 2025 में सोशल मीडिया पर अचानक घोषणा की कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में मध्यस्थता की है। हालांकि भारत सरकार ने जल्द ही साफ कर दिया कि इस युद्धविराम का क्रेडिट ट्रंप को नहीं दिया जा सकता और यह दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत का परिणाम है।
भारत सरकार की इस सधी हुई प्रतिक्रिया के पीछे का राज शशि थरूर ने खोला। थरूर ने कहा कि कूटनीति एक गुप्त प्रक्रिया है, जहाँ सार्वजनिक तौर पर जो दिखता है वह केवल 10% होता है, बाकी सभी चर्चा बंद कमरे में होती है। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी है, जिसे किसी भी तरह के राजनीतिक विवाद से नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
राहुल गांधी पर शशि थरूर की चुटकी
राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप की बात मानकर युद्धविराम को स्वीकार किया। इस बयान को लेकर शशि थरूर ने खुलकर हँसते हुए कहा कि भारत ने कभी किसी से मध्यस्थता नहीं मांगी। थरूर ने ट्रंप और राहुल गांधी दोनों के दावों को ‘छोटे मसले’ करार देते हुए कहा कि देश की बड़ी प्राथमिकताएं हैं, जिन पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत अमेरिका के साथ कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में लगा है और इस रणनीतिक गठजोड़ को कमजोर करने का कोई फायदा नहीं।
शशि थरूर की कूटनीतिक समझदारी
शशि थरूर, जो संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय तक कार्यरत रह चुके हैं, ने कूटनीतिक भाषा में बताया कि भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह सार्वजनिक तौर पर ऐसे दावों पर तीव्र प्रतिक्रिया न दें, क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच मौजूदा वार्ताएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा, “छोटे मामले को सुलझाकर हमें कल के बड़े मुद्दों पर फोकस करना है।”
राजनीतिक माहौल में थरूर की भूमिका
इस दौरान कांग्रेस के अंदर भी दो रुख सामने आए। जहां राहुल गांधी और कुछ नेता सरकार पर हमलावर थे, वहीं कुछ नेता जैसे मिलिंद देओरा ने थरूर की कूटनीतिक समझदारी की तारीफ की। देओरा ने कहा कि थरूर हमेशा देश को पार्टी से ऊपर रखते हैं।
शशि थरूर ने न केवल ट्रंप के दावे को परिपक्वता से टाल दिया, बल्कि राहुल गांधी की राजनीतिक बयानबाजी को भी बखूबी चुनौती दी। उनके इस बयान ने यह संदेश दिया कि भारत की विदेश नीति और कूटनीति में राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर राष्ट्रीय हित हैं।
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