
“हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 57 घोड़ों में से 10 की मौत और एक की ग्लैंडर पॉजिटिव रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। पशु विभाग अलर्ट पर, जानिए पूरा मामला।”
विषय सूची
- ग्लैंडर क्या है?
- घोड़ों की मौत का कारण
- रैपुरा अस्तबल की जांच
- PETA और लवान्या का खुलासा
- मेनका गांधी का हस्तक्षेप
- हाईकोर्ट में जनहित याचिका

ग्लैंडर क्या है?
ग्लैंडर एक घातक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से घोड़ों, गधों और खच्चरों में फैलती है। यह Burkholderia mallei नामक बैक्टीरिया के कारण होती है और गंभीर मामलों में इंसानों में भी संक्रमण हो सकता है। इसका प्रसार तेज़ होता है और संक्रमित जानवरों को अन्य जानवरों से तुरंत अलग करना आवश्यक होता है।
57 घोड़ों में से 10 की मौत: कारण क्या?
हैदराबाद से 27 अप्रैल को लाए गए कुल 57 घोड़ों में से 10 की अचानक मौत हो गई। पशु चिकित्सा विभाग ने तुरंत अलर्ट जारी करते हुए, सभी के सेंपल हरियाणा स्थित राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र, हिसार भेजे। इनमें से एक घोड़ा ग्लैंडर पॉजिटिव पाया गया है, जबकि बाकी की रिपोर्ट निगेटिव रही।
घोड़ों की हालत गंभीर
डॉक्टरों की टीम ने बताया कि कुछ घोड़ों में तेज बुखार, आंख और नाक से स्राव, सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण मिले। प्रशासन ने सभी घोड़ों को क्वारंटाइन में रखने के निर्देश दिए हैं।
रैपुरा अस्तबल: बुनियादी सुविधाओं का अभाव
जबलपुर के रैपुरा गांव में बनाए गए अस्तबल में घोड़ों को खुले वातावरण में रखने की बजाय बांध कर रखा गया था। इनके लिए भोजन, दवाई और देखभाल की उचित व्यवस्था नहीं थी। पशु चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, यह लापरवाही कई घोड़ों की मौत का कारण बनी।
PETA और लवान्या का खुलासा
घोड़ा प्रेमी लवान्या शेखावत ने PETA को जानकारी दी थी कि हैदराबाद रेसकोर्स में जानवरों पर अत्याचार हो रहा है। इसके बाद तेलंगाना सरकार ने कार्रवाई की और HPSL (Horse Power Super League) चलाने वाले सुरेश पलादुगू पर छापेमारी की।
ऑनलाइन सट्टेबाज़ी का आरोप
हैदराबाद में घोड़ों की दौड़ को फिलीपींस में सट्टेबाज़ी के लिए ऑनलाइन दिखाया जा रहा था। छापे से पहले सुरेश ने 100 से अधिक घोड़ों को जबलपुर समेत अन्य स्थानों पर शिफ्ट करवा दिया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
मेनका गांधी का हस्तक्षेप
पूर्व मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी इस पूरे मामले की निगरानी में थीं। लवान्या के अनुसार, उन्होंने हर रिपोर्ट को स्वयं देखा और जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने घोड़ों की मृत्यु की जांच रिपोर्ट पर पुनर्विचार की मांग की है, क्योंकि उसमें संदेहास्पद बातें सामने आई हैं।
हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका
एडवोकेट उमेश त्रिपाठी ने 23 मई को हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि काला घोड़ा बनाम नीला घोड़ा जैसी अवैध रेस कराई गई जिसमें करोड़ों का सट्टा फिलीपींस में लगाया गया। याचिका में घोड़ों की सुरक्षा, जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की गई है।
154 घोड़ों का लापता होना
त्रिपाठी के अनुसार, 154 घोड़े अलग-अलग स्थानों पर भेजे गए हैं ताकि सुरेश पलादुगू की गिरफ्तारी से बचा जा सके। कुछ घोड़ों को हैदराबाद में मारने की भी कोशिश की गई। इस याचिका पर समर वेकेशन के बाद सुनवाई होगी।
जबलपुर में ग्लैंडर बीमारी और घोड़ों की मौत ने पूरे पशु कल्याण तंत्र को हिला कर रख दिया है। प्रशासन को इस मामले में गंभीरता से कदम उठाने होंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, घोड़ों की देखभाल और उनकी सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान तैयार करने की जरूरत है।

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