
“ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर 7 महीने पहले गुम हुए निर्भय को DSP संतोष पटेल की सोशल मीडिया रील ने उसके परिवार से मिलवा दिया। जानिए इस हैरान करने वाली रियल-लाइफ कहानी को।”
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कैसे हुआ बच्चा गुम?
दिसंबर 2024 में ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन बदलते समय 19 वर्षीय निर्भय अपने पिता से बिछड़ गया। आगरा से इलाज के बाद घर लौटते समय उसके पिता पानी लेने गए थे, तभी निर्भय गायब हो गया। कई दिनों तक खोजबीन हुई, GRP को सूचना भी दी गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
आश्रम में गुजरे दिन
पुलिस ने उसे कुछ दिन बाद सड़क पर बेसहारा हालात में पाया, जहां आवारा कुत्ते उसका पीछा कर रहे थे। पहले उसे नाबालिग मानकर बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया, पर मेडिकल में बालिग पाया गया। इसके बाद उसे स्वर्ग सदन आश्रम भेज दिया गया। यहां विकास गोस्वामी की टीम ने उसकी लगातार काउंसलिंग की, लेकिन वह परिवार की जानकारी ठीक से नहीं बता पा रहा था।

रील का कमाल
15 जून 2025 को DSP संतोष पटेल फादर्स डे पर स्वर्ग सदन आए। वहां उन्होंने निर्भय से बात की और उसकी बोली से अंदाजा लगाया कि वह चित्रकूट इलाके से है। डीएसपी ने एक रील बनाई और 27 जून को उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। यह वीडियो ढाई घंटे में 10 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा, और चित्रकूट के निर्भय के रिश्तेदारों तक बात पहुंच गई।
परिवार से मिलन
28 जून को निर्भय के माता-पिता, भाई और मौसा 400 किलोमीटर दूर चित्रकूट से ग्वालियर पहुंचे और उसे अपने साथ ले गए। निर्भय ने माता-पिता को देखते ही रोते हुए गले लगाया। परिवार ने आश्रम में कागजी प्रक्रिया पूरी की और फिर निर्भय को घर लेकर रवाना हो गया।
डीएसपी पटेल की भूमिका
डीएसपी संतोष पटेल सोशल मीडिया के जरिए कई बेसहारा लोगों की मदद करते रहे हैं। इस घटना में भी उनकी सक्रियता और संवेदनशीलता ने एक परिवार को जोड़ने का काम किया। वर्तमान में डीएसपी पटेल बालाघाट के नक्सल प्रभावित इलाके में पदस्थ हैं।

यह कहानी साबित करती है कि सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग किस तरह बिछड़े हुए लोगों को उनके अपनों से मिलाने में मददगार बन सकता है। DSP पटेल, स्वर्ग सदन और विकास गोस्वामी की कोशिशों ने एक परिवार को फिर से मुस्कुराने का मौका दिया।
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