
रतलाम में कांग्रेस ने जीतू पटवारी पर दर्ज FIR को झूठा बताते हुए निरस्त करने की मांग की। प्रदेश की कानून व्यवस्था सुधारने की अपील की।
रतलाम में कांग्रेस नेताओं ने FIR निरस्त करने की मांग को लेकर बुधवार को एक ज्ञापन सौंपा। शहर कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश के डीजीपी को संबोधित ज्ञापन में कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर दर्ज यह FIR झूठे तथ्यों पर आधारित है, जिसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए। इस कदम से प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सकेगी।

FIR निरस्त करने की मांग पर कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 27 जून को जो FIR दर्ज की गई, वह भाजपा सरकार के राजनीतिक दबाव का नतीजा है। उनके मुताबिक जीतू पटवारी 25 जून को ओरछा दौरे पर थे, जहां उन्होंने खुद पीड़ितों से मुलाकात कर समस्या सुनी थी। वहां की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिससे सचाई साबित होती है। मध्यप्रदेश की अन्य खबरें में भी इस विषय पर जनता की राय सामने आई है।
राजनीतिक दबाव में दर्ज हुआ मामला?
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि भाजपा सरकार ने पीड़ितों पर शपथ पत्र के लिए दबाव बनाया और उसी के आधार पर यह झूठा मामला दर्ज कराया गया। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला मान रही है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग रखी।

कांग्रेस नेताओं की प्रमुख मांगें
कांग्रेस नेताओं ने FIR निरस्त करने की मांग के साथ-साथ प्रदेश की कानून व्यवस्था में सुधार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं प्रदेश की छवि खराब करती हैं और आम नागरिकों का भरोसा कमजोर करती हैं। प्रदर्शन में महेंद्र कटारिया, पारस दादा सकलेचा, शांतिलाल वर्मा, कुसुम चाहर सहित कई कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की अपील
शहर कांग्रेस कमेटी का दावा है कि अगर प्रशासन समय रहते FIR रद्द नहीं करता, तो जनता का गुस्सा और बढ़ सकता है। इसलिए डीजीपी के नाम ज्ञापन सौंपकर त्वरित निर्णय की मांग की गई। कार्यकर्ताओं ने भरोसा जताया कि प्रदेश सरकार कानून का पालन सुनिश्चित करेगी।
कांग्रेस नेताओं ने जताई चिंता
इस मामले में कांग्रेस नेताओं ने दोबारा दोहराया कि FIR निरस्त करने की मांग पूरी तरह वैध और लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका कहना था कि ऐसे झूठे मुकदमों से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है और जनहित के मुद्दों पर असर पड़ता है।
कांग्रेस ने प्रशासन से यह भी कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए ताकि आगे किसी राजनीतिक व्यक्ति पर झूठे केस दर्ज करने की नौबत न आए। लेटेस्ट न्यूज़ यहां पढ़ें पर अन्य महत्वपूर्ण अपडेट भी पढ़े जा सकते हैं।
कुल मिलाकर इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्मी ला दी है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला मान रही है, वहीं भाजपा पक्ष का तर्क है कि सब कुछ कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ।
इस बीच जनता में भी कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिससे साफ है कि FIR निरस्त करने की मांग आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकती है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह प्रयास प्रदेश में न्याय और लोकतंत्र को बचाने की दिशा में एक कदम कहा जा सकता है। इस तरह के ज्ञापन और विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी का प्रमाण हैं।
प्रदेश में अगर राजनीतिक हस्तक्षेप से मुकदमे दर्ज होते रहेंगे, तो जनता का भरोसा खो जाएगा। कांग्रेस की इस कार्रवाई को जनता के बीच काफी समर्थन मिला है और अब देखना होगा प्रशासन क्या कदम उठाता है।
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