
उज्जैन में पिता ने बच्चे को पटका — यह घटना मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर कस्बे में सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के घूंघट न करने से नाराज होकर अपने तीन साल के मासूम बेटे को सड़क पर फेंक दिया। इस दर्दनाक घटना में बच्चे को गंभीर चोटें आईं और आखिरकार उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पहले मारपीट और गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मामला दर्ज किया था, लेकिन अब बच्चे की मृत्यु के बाद आरोपी पिता पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह पूरा मामला उज्जैन शहर और आस-पास के गांवों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

कैसे हुआ उज्जैन में पिता ने बच्चे को पटका — जानिए पूरा मामला
29 जून को उज्जैन के बड़नगर थाना क्षेत्र में रहने वाला आजाद शाह अपनी पत्नी मुस्कान के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचा था। दोनों के बीच पारिवारिक विवाद लंबे समय से चल रहा था। थाने से लौटते समय जब वे चौपाटी के पास पहुंचे, तभी बारिश शुरू हो गई और आजाद ने अपने बेटे तनवीर को गोद में उठा लिया। कुछ ही देर में गांव के लोग सामने से आते दिखे, तो आजाद ने मुस्कान से सिर पर घूंघट डालने को कहा। मुस्कान के इनकार करने पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। गुस्से में बेकाबू होकर आजाद ने तीन साल के तनवीर को अपनी गोद से सड़क पर पटक दिया।
घटना के चश्मदीदों ने बताया कि बच्चे को पटकने के बाद तनवीर के सिर, हाथ और पैरों में गहरी चोट आई। तुरंत उसे बड़नगर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर थी। हालत बिगड़ने पर परिजन ने उसे उज्जैन जिला अस्पताल में भर्ती कराया और फिर निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। बुधवार रात इलाज के दौरान तनवीर की मौत हो गई।
मां की शिकायत पर आरोपी पिता गिरफ्तार
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और आरोपी पिता को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने मुस्कान की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 109, 296 समेत अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। बाद में उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। बच्चे की मौत के बाद अब धारा 302 (हत्या) जोड़ दी गई है।
घूंघट विवाद ने छीनी बच्चे की जान
गांव के लोगों के मुताबिक आजाद को अक्सर पत्नी के घूंघट न करने पर गुस्सा आता था। जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन भी वह अपनी पत्नी को घूंघट डालने को लेकर दबाव बना रहा था। इसी झगड़े में उसने तीन साल के मासूम पर ऐसा जुल्म किया कि उसकी जान ही चली गई। बड़नगर थाना प्रभारी अशोक पाटीदार ने बताया कि मुस्कान ने साफ कहा कि उसके पति ने जानबूझकर बेटे को पटककर मारने की कोशिश की थी।

इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। सोशल मीडिया पर भी उज्जैन में पिता ने बच्चे को पटका जैसे शब्द ट्रेंड करने लगे हैं। बच्चों के अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ता भी इस मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। UNICEF ने भी हाल के समय में घरेलू हिंसा और बाल हिंसा के मामलों में सख्त कदम उठाने की अपील की है।
परिवार में पहले भी विवाद
सूत्रों के अनुसार, मुस्कान और आजाद के बीच पहले भी घरेलू झगड़े होते रहे हैं। रिश्तेदारों ने कई बार समझौता कराने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। बच्चे की मौत ने अब दोनों परिवारों में गहरा सदमा पहुंचाया है। घटना के बाद मुस्कान ने कहा कि वह अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए आखिर तक लड़ाई लड़ेगी।
मासूम की मौत ने समाज को झकझोरा
बड़नगर की इस घटना ने समाज को झकझोर दिया है। लोग यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर एक पिता इतनी बेरहमी कैसे कर सकता है? मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि गुस्से में लिए गए हिंसक फैसले बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। घरेलू कलह और महिला के घूंघट जैसे परंपरागत मुद्दे बच्चों की जिंदगियों पर किस तरह असर डाल सकते हैं, यह घटना उसका दर्दनाक उदाहरण है।
अगर आपके आसपास भी घरेलू हिंसा या बच्चों के साथ हिंसा की कोई घटना हो रही है, तो तुरंत यहां रिपोर्ट करें या इस पेज पर अधिक जानकारी प्राप्त करें।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल आरोपी पिता जेल में है और पुलिस ने हत्या की धारा लगाकर केस को कोर्ट में भेज दिया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत सबूत और गवाहों के आधार पर चार्जशीट तैयार की जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि आरोपी को सख्त सजा मिलेगी ताकि भविष्य में कोई और पिता इस तरह का जघन्य कदम न उठाए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि छोटे बच्चों के साथ ऐसी हिंसा उनके मानसिक विकास पर भी गहरा प्रभाव डालती है। उज्जैन में पिता ने बच्चे को पटका जैसी घटनाएं केवल कानूनी ही नहीं, सामाजिक और नैतिक चिंता का विषय भी हैं। यदि समय रहते परामर्श और काउंसलिंग मिल जाए, तो ऐसे गुस्से भरे अपराध रोके जा सकते हैं।
इसी वजह से सरकार और सामाजिक संगठनों को चाहिए कि परिवारों को गुस्से पर नियंत्रण और भावनात्मक प्रबंधन की ट्रेनिंग देने के लिए अभियान चलाएं।
समाज की जिम्मेदारी
बच्चे हमारी जिम्मेदारी हैं। उज्जैन में पिता ने बच्चे को पटका जैसी खबरें यह दर्शाती हैं कि समाज को घरेलू हिंसा पर और गंभीर होना होगा। महिला और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देकर हम कई जिंदगियों को बचा सकते हैं।
अगर आप घरेलू हिंसा की चपेट में हैं या किसी को जानते हैं जिसे मदद चाहिए, तो कृपया इस लिंक के माध्यम से मदद लें और कानूनन कार्रवाई में सहयोग करें।
यह घटना बताती है कि छोटी-सी बहस भी कितनी भयावह बन सकती है। उज्जैन में पिता ने बच्चे को पटका, यह सुनकर हर किसी का दिल दहल जाता है। हमें यह समझना होगा कि गुस्से में लिया गया एक गलत कदम अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है। उम्मीद है कि इस केस में मासूम को न्याय मिलेगा और आरोपी को कड़ी सजा दी जाएगी, ताकि आगे ऐसी घटनाओं पर लगाम लगे।
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