
इंदौर मेडिकल कॉलेज फर्जीवाड़ा का मामला सीबीआई की जांच में बड़ा खुलासा बनकर सामने आया है। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का गलत इस्तेमाल कर बायोमैट्रिक अटेंडेंस में फर्जी थंब इम्प्रेशन लगाए गए, ताकि फैकल्टीज की नियमित उपस्थिति दिखा सकें। जांच में कॉलेज के चेयरमैन सुरेश भदौरिया और यूजीसी के पूर्व चेयरमैन डीपी सिंह समेत कई लोगों की भूमिका उजागर हुई है।
मुख्य बिंदु:
- इंदौर मेडिकल कॉलेज में कैसे हुआ फर्जी अटेंडेंस?
- सीबीआई की जांच में कौन-कौन फंसा?
- इंस्पेक्शन की तारीख का लीक होना
- रावतपुरा सरकार और हवाला कनेक्शन
- निष्कर्ष
इंदौर मेडिकल कॉलेज में कैसे हुआ फर्जी अटेंडेंस?
इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम में AI तकनीक का गलत इस्तेमाल सामने आया। सीबीआई जांच के मुताबिक, कॉलेज प्रबंधन ने फर्जी थंब इम्प्रेशन तैयार किए ताकि फैकल्टीज की उपस्थिति नियमित दिखाई जा सके। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) या नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के इंस्पेक्शन के समय यही डेटा पेश किया जाता था।
सीबीआई की जांच में कौन-कौन फंसा?

सीबीआई ने इस मामले में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश भदौरिया और यूजीसी के पूर्व चेयरमैन व देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डीपी सिंह को आरोपी बनाया है। डीपी सिंह 2018–2021 में यूजीसी चेयरमैन रहे और कई विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर रह चुके हैं। सीबीआई के अनुसार, इन पर कॉलेजों को गलत तरीके से मान्यता दिलाने का आरोप है।UGC भ्रष्टाचार मामलों की पूरी जानकारी
इंस्पेक्शन की तारीख का लीक होना
जांच रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन को इंस्पेक्शन की तारीख पहले ही सरकारी अफसरों के जरिए पता चल जाती थी। इसके बाद फर्जी फैकल्टी, मरीज और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था पहले से कर ली जाती थी। रावतपुरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के चेयरमैन रावतपुरा सरकार का नाम भी सामने आया, जिन्हें खास नेटवर्क से इंस्पेक्शन की तारीखें लीक हो जाती थीं।
हवाला और धार्मिक कार्यक्रमों से जुड़ा लेन-देन
रावतपुरा सरकार और सुरेश भदौरिया के बीच हवाला और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए मोटी रकम के लेनदेन के भी सबूत सीबीआई को मिले हैं। इंस्पेक्शन के दौरान प्रॉक्सी फैकल्टीज और मरीज दिखाने की गड़बड़ी इस नेटवर्क का हिस्सा थी।नेशनल मेडिकल कमीशन की वेबसाइट
इंदौर इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में AI आधारित बायोमैट्रिक फर्जीवाड़ा ने मेडिकल शिक्षा की साख पर सवाल खड़े किए हैं। सीबीआई की जांच अभी भी जारी है और बड़े अफसरों की भूमिका की परतें खुलती जा रही हैं।
यदि आप मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता चाहते हैं, तो इस खबर को शेयर करें और अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।
📢 हमारे अन्य प्लेटफॉर्म से जुड़ें:
📞 खबरों व विज्ञापन के लिए संपर्क करें:
9977238238, 9977290137




