
जबलपुर के मढ़ई क्षेत्र में मस्जिद को लेकर शुरू हुआ विवाद तब और उग्र हो गया जब कलेक्टर की फेसबुक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। पोस्ट में मस्जिद को वैध बताया गया था, जिससे हिंदू संगठनों ने नाराजगी जताई और भारी विरोध प्रदर्शन किया।
- विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
- कलेक्टर की पोस्ट ने कैसे बिगाड़ा माहौल?
- हिंदू संगठनों का उग्र विरोध
- प्रशासन की कार्यवाही और स्पष्टीकरण
- मस्जिद कमेटी की प्रतिक्रिया
- विवाद की जड़ और आरोप
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
जबलपुर के रांझी क्षेत्र स्थित ग्राम मढ़ई में स्थित मस्जिद को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि मस्जिद का निर्माण गायत्री मंदिर की जमीन पर किया गया है। कुछ दिनों पहले मस्जिद में प्रथम तल पर निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जिससे विवाद की चिंगारी भड़की।
कलेक्टर की पोस्ट ने कैसे बिगाड़ा माहौल?
12 जुलाई को कलेक्टर जबलपुर के आधिकारिक फेसबुक पेज से एक पोस्ट शेयर की गई जिसमें कहा गया कि मस्जिद का निर्माण उनके ही कब्जे वाली ज़मीन पर हुआ है और मंदिर की जमीन पर निर्माण का कोई प्रमाण नहीं मिला। पोस्ट में यह भी लिखा गया कि यह मामला ऐतिहासिक विवाद से जुड़ा नहीं है, जिससे संगठनों में नाराजगी और तेज़ हो गई।

हिंदू संगठनों का उग्र विरोध
कलेक्टर की पोस्ट के बाद विहिप और बजरंग दल सहित अन्य हिंदू संगठनों ने उग्र प्रदर्शन किया। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कलेक्टर का प्रतीकात्मक अर्थी जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने मस्जिद की ओर कूच करने की कोशिश की, जिन्हें बलपूर्वक रोका गया।


प्रशासन की कार्यवाही और स्पष्टीकरण
प्रशासन की तरफ से स्पष्टीकरण आया कि यह पोस्ट कलेक्टर की जानकारी के बिना पब्लिश हुई थी। एसडीएम रांझी रघुवीर सिंह मरावी को पद से हटाकर ऋषभ जैन को नियुक्त किया गया। नए एसडीएम ने माना कि बंदोबस्त के दौरान सर्वे नंबरों और नक्शों में त्रुटियां हुई हैं और प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में लंबित है।

मस्जिद कमेटी की प्रतिक्रिया
मस्जिद कमेटी ने स्पष्ट किया कि मस्जिद जिस जमीन पर है, वह उनकी मालिकाना भूमि है और 1980 से पहले से वहां मस्जिद है। एडवोकेट इरशाद अली ने बताया कि मस्जिद के नाम पर दो खसरे 165 और 166 में दर्ज हैं। प्रशासन की गलती से एक खसरे से नाम हट गया, जिसकी सुधार प्रक्रिया कलेक्टर कोर्ट में चल रही है।
विवाद की जड़ और आरोप
हिंदू संगठनों का आरोप है कि मस्जिद का निर्माण खसरा नंबर 169 पर किया गया है जो गायत्री बाल मंदिर की जमीन है। वक्फ बोर्ड को केवल 1000 वर्गफीट भूमि दी गई थी जबकि मस्जिद करीब 3000 वर्गफीट में फैली है। इसके अलावा मदरसे के संचालन का भी आरोप लगाया गया है। विहिप इस मामले को 2021 से उठाती आ रही है।
विवाद केवल धार्मिक नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी परिणाम है। बटांकों में त्रुटियां, रकबे की गड़बड़ियां और सीमांकन में पारदर्शिता की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। प्रशासन को चाहिए कि स्पष्ट और निष्पक्ष जांच के साथ दोनों पक्षों को संतुष्ट करें ताकि शहर की शांति बनी रहे।
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