
रतलाम छात्रावास विवाद: रतलाम में जनजातीय छात्रावास की छात्राओं ने वार्डन के खराब व्यवहार, भोजन की गुणवत्ता और धमकी भरे शब्दों को लेकर जमकर विरोध किया।”

- विरोध की शुरुआत
- छात्राओं के आरोप – पर्दे में रहो नहीं तो सड़क पर
- जनसुनवाई में पहुंची छात्राएं
- ABVP का अल्टीमेटम
- छात्राओं की चिंता: जिम्मेदार कौन?
- वार्डन की सफाई
- पुलिस और प्रशासन की भूमिका
- पृष्ठभूमि और आगे की कार्यवाही
विरोध की शुरुआत
24 जुलाई 2025 को रतलाम के आदिवासी सीनियर कन्या छात्रावास की छात्राएं वार्डन के व्यवहार और खराब सुविधाओं को लेकर जनजाति विकास कार्यालय पहुंचीं। ABVP कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया और अधीक्षिका को हटाने की मांग की।
छात्राओं के आरोप – पर्दे में रहो नहीं तो सड़क पर
छात्राओं ने आरोप लगाया कि वार्डन उन्हें जबरन पर्दे में रहने के लिए कहती हैं और खुले व्यवहार पर नाराजगी जताती हैं। ABVP कार्यकर्ताओं द्वारा जवाब मांगने पर वार्डन ने विवादास्पद टिप्पणी कर दी – “क्या बच्चियों को आपके आगे परोस दूं?”
जनसुनवाई में पहुंची छात्राएं
मंगलवार को लगभग 10-12वीं कक्षा की छात्राएं स्कूल नहीं जाकर अपने बैग और हाथों में कच्ची दाल लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं। उन्होंने एडीएम डॉ. शालिनी श्रीवास्तव के सामने अपनी समस्याएं रखीं, जिसमें खाना खराब होना, व्यवहार अनुचित होना और मानसिक दबाव जैसी बातें शामिल थीं।
ABVP का अल्टीमेटम
ABVP के कार्यकर्ताओं ने छात्राओं के साथ मिलकर तीन दिन का अल्टीमेटम दिया कि यदि वार्डन को न हटाया गया तो पूरे जिले में आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाया कि छात्राओं की शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए।
छात्राओं की चिंता: जिम्मेदार कौन?

छात्राओं ने चिंता जताई कि यदि उन्हें या किसी अन्य छात्रा को कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। एक छात्रा ने रोते हुए कहा कि “अगर मैम को कुछ होता है तो जिम्मेदार हम होंगे, लेकिन अगर हमें कुछ होता है तो कौन जवाबदेह होगा?”
वार्डन की सफाई
वार्डन सुगना मईड़ा ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पूरी सुविधाएं दी जा रही हैं और कीड़ों वाली दाल जैसी बातें निराधार हैं। वार्डन ने खुद को डायबिटीज मरीज बताते हुए कहा कि उन्हें मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका

घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी गायत्री सोनी और सहायक आयुक्त रंजना सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से बयान लिए और उन्हें आश्वासन दिया कि पूरी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।
पृष्ठभूमि और आगे की कार्यवाही
पिछले मंगलवार को भी छात्राएं दाल और शिकायतों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं। सहायक आयुक्त रंजना सिंह ने बताया कि वह जांच टीम का हिस्सा नहीं थीं, लेकिन उन्होंने कलेक्टर से विशेष कमेटी बनाकर जांच की मांग की है। ABVP द्वारा दिए गए अल्टीमेटम को देखते हुए प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
रतलाम के इस छात्रावास विवाद ने स्थानीय प्रशासन और जनजातीय विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। छात्राओं की सुरक्षा, सुविधा और मानसिक स्थिति को लेकर जल्द और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
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