
इंदौर बायपास फ्लायओवर जाम के चलते तीन मौतों के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एनएचएआई और निर्माण एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सर्विस रोड का निर्माण पहले किया जाना चाहिए था। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि आगामी 30 दिनों के भीतर सभी सुधारात्मक कार्य पूरे कर रिपोर्ट सौंपी जाए।

- हाईकोर्ट की नाराजगी और निर्देश
- फ्लायओवर निर्माण और जाम से मौतें
- इंडियन रोड कांग्रेस के दिशा-निर्देश
- सुरक्षा और वैकल्पिक प्रबंधों की अनिवार्यता
- NHAI और ठेकेदार की जवाबदेही
- एनएचएआई का बयान और विवाद
हाईकोर्ट की नाराजगी और निर्देश
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि फ्लायओवर निर्माण के पहले वैकल्पिक ट्रैफिक व्यवस्था और सर्विस रोड की व्यवस्था करना आवश्यक था। बेंच ने निर्माण कार्य से उत्पन्न अव्यवस्थित यातायात के कारण तीन लोगों की मृत्यु को गंभीर माना।
कोर्ट ने कहा कि सड़क निर्माण से जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए, और NHAI को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़क परिवहन मंत्रालय के मानकों के अनुसार कार्य हो।
फ्लायओवर निर्माण और जाम से मौतें
अर्जुन बड़ोद और एमआर-10 जंक्शन के बीच फ्लायओवर निर्माण के दौरान 24 जून 2025 को हुए जाम में तीन एम्बुलेंस फंस गईं। इनमें सवार मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद अधिवक्ता द्वारा जनहित याचिका दाखिल की गई।
इंडियन रोड कांग्रेस के दिशा-निर्देश
कोर्ट ने कहा कि इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी सड़क निर्माण या फ्लायओवर कार्य से पहले वैकल्पिक सर्विस रोड अनिवार्य है। इसके साथ ही निर्माण क्षेत्र में पर्याप्त संकेतक, डायवर्जन मार्ग, ट्रैफिक कंट्रोलर, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए।
सुरक्षा और वैकल्पिक प्रबंधों की अनिवार्यता
हाईकोर्ट द्वारा दिए गए विशेष निर्देश इस प्रकार हैं:
- फ्लायओवर कार्य प्रारंभ करने से पहले वैकल्पिक सर्विस रोड तैयार करना अनिवार्य।
- एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो।
- हाई-इंटेंसिटी रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनेज, डेलीनेटर्स, बैरिकेड्स, रंबल स्ट्रिप्स और स्पीड लिमिट बोर्ड लगाए जाएं।
- रात में प्रकाश व्यवस्था हो और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए फ्लैग मैन की नियुक्ति हो।
NHAI और ठेकेदार की जवाबदेही
कोर्ट ने NHAI और ठेकेदार दोनों को इस लापरवाही का जिम्मेदार माना। अब दोनों को 30 दिन में सुधार कार्य करना होगा और कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही अदालत ने निर्देश दिए कि यदि सुधार कार्य निर्धारित समय में पूरे नहीं होते हैं, तो अगली सुनवाई में दोनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एनएचएआई का बयान और विवाद
हालांकि, एनएचएआई ने इस पूरे घटनाक्रम को भ्रामक बताया है। परियोजना निदेशक सोमेश बांझल का कहना है कि तीनों मौतें अलग-अलग क्षेत्रों की हैं और अर्जुन बड़ोद बायपास से संबंधित नहीं हैं।
उनका कहना है कि एक व्यक्ति की मौत शाजापुर से इंदौर आते समय हुई, जबकि एक अन्य की मौत लसूड़िया क्षेत्र में हुई, जिनका जाम से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से न लेते हुए व्यवस्थागत विफलता पर सख्त रुख अपनाया।
यह पूरा मामला राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में लापरवाही का उदाहरण बनकर उभरा है।
निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सार्वजनिक असुविधा की घटनाएं बार-बार सामने आती हैं, लेकिन इस बार अदालत ने तत्काल और समयबद्ध सुधार कार्यों का स्पष्ट आदेश जारी कर सख्त संदेश दिया है।
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