
आयुष हत्याकांड मामले में रतलाम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामली थाने के सब इंस्पेक्टर आरके चौहान को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सीधे एसपी अमित कुमार द्वारा की गई, जिसमें स्पष्ट रूप से लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया गया।

- एसआई आरके चौहान सस्पेंड, एसपी ने की सख्त कार्रवाई
- नाबालिग आयुष की हत्या के मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल
- हत्या की रात सब इंस्पेक्टर ने चौकीदार की सूचना को नजरअंदाज किया
- 5 आरोपी गिरफ्तार, रिमांड व जेल भेजा गया
- पेड़ से बांधकर की गई थी बेरहमी से पिटाई
- और नामों के सामने आने की संभावना
सूचना के बाद भी नहीं की कार्रवाई

शुक्रवार रात मेवासा गांव में घटित आयुष हत्याकांड को लेकर अब सामने आ रहा है कि गांव के चौकीदार ने बीट प्रभारी सब इंस्पेक्टर आरके चौहान को चोर की आशंका की जानकारी दी थी। इसके बावजूद चौहान ने उसे 100 नंबर पर कॉल करने की सलाह देकर फोन काट दिया।
एसपी ने उठाया कड़ा कदम
घटना के बाद जब इस तथ्य की जानकारी एसपी अमित कुमार को मिली तो उन्होंने तुरंत चौहान को सस्पेंड कर दिया। पुलिस महकमे में इस कार्रवाई को एक बड़ी सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस मामले पर अधिकारी खुलकर बयान नहीं दे रहे।
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पांच आरोपी अब तक गिरफ्तार
आयुष हत्याकांड में पुलिस ने मृतक की प्रेमिका के माता-पिता समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। लड़की के पिता को दो दिन की पुलिस रिमांड पर रखा गया है जबकि मां सहित अन्य चार को जेल भेज दिया गया है।
और लोग हो सकते हैं आरोपी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों की पहचान की जा सकती है। आयुष हत्याकांड में स्थानीय लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
ऐसे हुई थी हत्या
कांडरवासा गांव का निवासी 17 वर्षीय आयुष मालवीय शुक्रवार रात को अपनी प्रेमिका से मिलने मेवासा गया था। वहीं लड़की के परिजनों ने उसे पकड़ लिया। पहले सिर मुंडवाया गया और फिर पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। पीटाई इतनी भीषण थी कि आयुष की मौके पर ही मौत हो गई।
ग्रामीणों का विरोध, फोरलेन पर प्रदर्शन
घटना के विरोध में कांडरवासा के ग्रामीणों ने शव को इंदौर-लेबड़ फोरलेन पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
थाने की कार्यशैली पर सवाल
यह आयुष हत्याकांड पुलिस के खुफिया तंत्र और फील्ड इंटेलिजेंस पर भी सवाल खड़े करता है। गांव से बार-बार घटनाएं सामने आने के बावजूद स्थानीय पुलिस की सुस्ती से जनाक्रोश बढ़ा है।
लड़की के परिजनों की साजिश?
प्रथम दृष्टया यह सामने आ रहा है कि लड़की के परिवार ने पूर्व नियोजित तरीके से आयुष को बुलाया और फिर इस वीभत्स घटना को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस जांच अभी जारी है।
सामाजिक संगठनों ने उठाई आवाज
विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आयुष हत्याकांड को लेकर नाबालिगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।


आयुष हत्याकांड ने रतलाम जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रशासन को सख्त जांच और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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