
जेपी अस्पताल की डेंटल यूनिट को अपग्रेड करने की 6 करोड़ की योजना अधर में लटक गई। जानिए क्यों निरस्त हुआ टेंडर और क्या है मरीजों की परेशानी।

- जेपी अस्पताल में डेंटल यूनिट की अधूरी योजना
- कार्डियक यूनिट के बाद डेंटल यूनिट का भी टेंडर निरस्त
- 6 करोड़ के प्रोजेक्ट की शुरुआत और रुकावट
- मरीजों की बढ़ती समस्याएं
- क्या सुविधाएं मिलतीं नई यूनिट में
- प्रशासन की स्थिति और जवाबदेही
- सरकार से उम्मीदें और समाधान की ज़रूरत
भोपाल। राजधानी के जेपी अस्पताल डेंटल यूनिट को अपग्रेड करने की बहुप्रतीक्षित योजना एक बार फिर अधर में लटक गई है। जहां पहले कार्डियक यूनिट को लेकर उम्मीदें जगी थीं, वहीं अब डेंटल यूनिट का टेंडर भी निरस्त कर दिया गया है। इससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के हजारों मरीजों को तगड़ा झटका लगा है, जो बेहतर डेंटल ट्रीटमेंट के लिए इसी अस्पताल पर आश्रित थे।
जेपी अस्पताल में डेंटल यूनिट की अधूरी योजना
जेपी अस्पताल में डेंटल यूनिट को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना पर वर्षों से काम चल रहा था। 6 करोड़ रुपए की इस परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक उपकरण, सर्जिकल ओटी, नई वॉर्ड व्यवस्था और विशेष दंत सर्जरी इकाइयों को स्थापित किया जाना था। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी बाधाओं के चलते यह सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।
कार्डियक यूनिट के बाद डेंटल यूनिट का भी टेंडर निरस्त
इससे पहले भी जेपी अस्पताल में कार्डियक यूनिट का टेंडर निरस्त किया गया था। उस वक्त उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए भरोसा दिलाया था कि जल्द ही प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। अब वही स्थिति डेंटल यूनिट के साथ हो गई है, जिससे लोगों में प्रशासन की नीयत और कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
6 करोड़ के प्रोजेक्ट की शुरुआत और रुकावट
इस प्रोजेक्ट की योजना दो साल पहले बनाई गई थी और इसे स्वास्थ्य विभाग से मंजूरी भी मिल गई थी। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए 55 आधुनिक मशीनों और उपकरणों की सूची तैयार की थी। निर्माण कार्य की शुरुआत भी हो चुकी थी, लेकिन मशीनों की खरीदी को लेकर जो टेंडर निकाला गया था, वह निरस्त कर दिया गया। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है जो गंभीर डेंटल सर्जरी के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं।
मरीजों की बढ़ती समस्याएं
वर्तमान में जेपी अस्पताल के डेंटल विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। यहां केवल सामान्य उपचार जैसे रूट कैनाल, दांत निकालना और फिलिंग जैसी सेवाएं ही उपलब्ध हैं। जटिल समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को एम्स या हमीदिया अस्पताल में रेफर किया जा रहा है, जहां पहले से ही लंबी कतारें हैं। कई मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी हालत और गंभीर हो रही है।
क्या सुविधाएं मिलतीं नई यूनिट में
अगर यह डेंटल यूनिट बन जाती, तो मरीजों को निम्नलिखित उन्नत सेवाएं मिलतीं:
- अकल दाढ़ की सर्जरी
- जबड़ा फ्रैक्चर का उपचार
- बच्चों के दांतों की नसों की समस्याओं का समाधान
- केविटी की परमानेंट फिलिंग
- ओरल मैक्सोफेशियल सर्जरी
इन सुविधाओं के अभाव में मरीज अब निजी अस्पतालों की ओर मजबूरी में रुख कर रहे हैं, जहां खर्च लाखों में होता है।
प्रशासन की स्थिति और जवाबदेही
जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला अभी मेरी जानकारी में नहीं है। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट एनएचएम के अंतर्गत था और उन्होंने इस विषय में जानकारी जुटाने के बाद ही कुछ कहने की बात कही। इससे यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल प्रशासन को खुद भी यह नहीं पता कि योजना कहां अटक गई है।
सरकार से उम्मीदें और समाधान की ज़रूरत
भोपाल जैसे महानगर में एक ऐसा सरकारी अस्पताल जो सस्ती और गुणवत्ता युक्त दंत चिकित्सा सेवाएं दे सके, समय की मांग है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज किया जाए ताकि जनता को समय पर इलाज मिल सके।
Source: timesofmp.in
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