

इंदौर। मालेगांव ब्लास्ट केस के प्रमुख आरोपी रामजी कलसांगरा पिछले 17 वर्षों से गायब हैं। 2008 में हुए धमाके में उन्हें और संदीप डांगे को आरोपी बनाया गया था, लेकिन इन दोनों की अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस बीच NIA कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया। ऐसे में रामजी के परिवार की पीड़ा फिर सतह पर आई है।
- 17 साल बाद भी अज्ञात हैं रामजी कलसांगरा
- पारिवारिक संघर्ष और सामाजिक पीड़ा
- मालेगांव केस में जांच एजेंसियों का विरोधाभास
- NIA की संपत्ति कुर्की और फोटो ज़ब्ती
- पत्नी का भरोसा: मैं आज भी सुहागिन हूं
- ब्लास्ट की प्लानिंग और चार्जशीट
- कानूनी स्थिति और तकनीकी दुविधा
17 साल बाद भी अज्ञात हैं रामजी कलसांगरा
29 सितंबर 2008 को हुए मालेगांव ब्लास्ट में छह लोगों की जान गई थी। इस केस में रामजी कलसांगरा का नाम प्रमुख आरोपी के रूप में सामने आया, लेकिन वह गिरफ्तारी से पहले ही लापता हो गए। बेटे देवव्रत बताते हैं कि दशहरे के दिन (9 अक्टूबर 2008) आखिरी बार उन्होंने अपने पिता को देखा था।
पारिवारिक संघर्ष और सामाजिक पीड़ा
देवव्रत कहते हैं कि उनके पिता के लापता होने के बाद मां लक्ष्मी कलसांगरा ने खेती और मजदूरी कर तीनों बेटों की परवरिश की। कई बार ATS और NIA अधिकारियों ने परेशान किया, लेकिन परिवार ने न स्कूल बदला न शहर।
मालेगांव केस में जांच एजेंसियों का विरोधाभास
ATS और NIA की चार्जशीट्स में कई विरोधाभास सामने आए। ATS ने दावा किया था कि रामजी ने संदीप डांगे के साथ मिलकर प्लानिंग की और बाइक में बम लगाया। जबकि NIA की जांच में सबूत कमज़ोर साबित हुए।
NIA की संपत्ति कुर्की और फोटो ज़ब्ती
रामजी का इंदौर स्थित फ्लैट भी कुर्क कर लिया गया है। जांच एजेंसियों ने घर से सभी दस्तावेज, फोटो और बच्चों की यादें भी जब्त कर लीं।
पत्नी का भरोसा: मैं आज भी सुहागिन हूं
लक्ष्मी कलसांगरा कहती हैं, “मैं आज भी उन्हें जीवित मानती हूं, मेरी मांग का सिंदूर नहीं मिटा है। जांच एजेंसियों को बताना चाहिए कि मेरे पति जीवित हैं या मृत।”
ब्लास्ट की प्लानिंग और चार्जशीट
चार्जशीट के अनुसार, 11 जून 2008 को इंदौर में हुई मीटिंग में साध्वी प्रज्ञा ने रामजी और संदीप को सुधाकर द्विवेदी से मिलवाया था। जुलाई और अगस्त में और मीटिंग्स हुईं जिनमें विस्फोटक देने की प्लानिंग की गई।
कानूनी स्थिति और तकनीकी दुविधा
एडवोकेट जगदीश गुप्ता के अनुसार, रामजी और संदीप CRPC की धारा 173(8) के तहत वांटेड हैं। जब तक वे पकड़े नहीं जाते, उनकी चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकती।
रामजी कलसांगरा का 17 वर्षों से लापता रहना सिर्फ एक व्यक्ति की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था की एक अनसुलझी गाथा बन चुका है। अब समय है कि जांच एजेंसियां इस रहस्य पर अंतिम जवाब दें।
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