
श्योपुर बाढ़ हादसा: श्योपुर में पार्वती नदी की बाढ़ में ताऊ-भतीजे की दर्दनाक मौत हुई। खेत में दोनों के शव एक-दूसरे से लिपटे मिले। गांव में मातम पसरा, जानिए पूरी घटना।
श्योपुर (मध्यप्रदेश)। श्योपुर की ताज़ा खबरें बाढ़ की विभीषिका ने श्योपुर जिले के आमलदा गांव में एक मार्मिक त्रासदी को जन्म दिया। पार्वती नदी की तेज धारा में बहकर 45 वर्षीय राजू यादव और उसका 13 वर्षीय भतीजा शिवम काल के गाल में समा गए। दोनों के शव अगली सुबह खेत में एक-दूसरे से लिपटे मिले, जिससे यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि संवेदना का विषय बन गया।

जान जोखिम में डालकर खेत पर गए थे दोनों
राजू यादव और शिवम बुधवार शाम खेत पर ट्यूबवेल पाइप और अन्य सामान देखने निकले थे। खेत पार्वती नदी से सटा हुआ है, और बाढ़ के कारण रास्ते बेहद खतरनाक हो चुके थे। बारिश की रफ्तार थोड़ी थमने पर दोनों ने सोचा कि खेत जाकर जरूरी सामान निकाल लाएं। लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटे।
सुबह जब गांववालों ने देखा, आंखें भर आईं
गुरुवार सुबह जब गांववालों और परिजनों ने तलाश शुरू की तो खेत में दिल दहला देने वाला दृश्य मिला। राजू और शिवम के शव आपस में लिपटे हुए थे। शिवम की उंगलियां ताऊ के बालों में फंसी थीं और राजू की मुट्ठी में भतीजे के पैर। ग्रामीणों का मानना है कि शिवम ने बाढ़ के पानी से बचने के लिए ताऊ के कंधों पर चढ़ने की कोशिश की होगी, लेकिन दोनों तेज बहाव में बह गए।
कच्चे रास्ते, कीचड़ और पहाड़ी खेत
जिस खेत में ये हादसा हुआ, वह गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर है। पूरा रास्ता कीचड़ से भरा हुआ है और खेत पहाड़ी ढलान पर स्थित है। पार्वती नदी खेत से लगभग 200 मीटर की दूरी पर बहती है। बारिश के चलते खेत में धान बोई गई थी, लेकिन तेज बहाव के कारण वहां पानी भर गया था।
ताऊ-भतीजे का रिश्ता, एक गहरी भावनात्मक डोर
राजू यादव अविवाहित था और शिवम से उसका बहुत गहरा लगाव था। शिवम जब मात्र ढाई साल का था, तभी उसकी मां का निधन हो गया था। तब से राजू ही उसका सहारा था। गांव में शिवम, ताऊ को “बड़े पापा” कहकर पुकारता था। दोनों की बॉन्डिंग बाप-बेटे जैसी थी।
परिवार में पसरा मातम, गांव स्तब्ध
राजू यादव तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। छोटे भाई बाबूलाल और कमल यादव उसके साथ रहते थे। शिवम कमल का बेटा था और घर में इकलौता बेटा। तीन बहनों का भाई शिवम पूरे परिवार का लाडला था। हादसे के बाद गांव के हर कोने में मातम पसरा है। ग्रामीणों की आंखें नम हैं।
जलस्तर में गिरावट, पर नुकसान बड़ा
श्योपुर में बाढ़ के हालात अब थोड़ा नियंत्रण में हैं। पार्वती नदी का जलस्तर 20 घंटे में करीब 9 मीटर और चंबल नदी का स्तर 5 मीटर तक घट गया है। गुरुवार शाम को चंबल का जलस्तर 192.46 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो खतरे के निशान से नीचे है। वहीं, पार्वती नदी खातौली में 196.46 मीटर पर मापी गई। हालांकि बाढ़ का असर अब भी लोगों के जीवन पर है।
सरकारी राहत की दरकार
परिवार अब शासन से राहत की उम्मीद कर रहा है। मृतक राजू यादव परिवार की रीढ़ था, वहीं शिवम परिवार का भविष्य। अब दोनों नहीं रहे, तो घर के आर्थिक और भावनात्मक संतुलन पर गंभीर संकट आ गया है।
घटना से जुड़े प्रमुख बिंदु
- राजू यादव और शिवम बुधवार शाम खेत गए थे।
- रात भर लापता रहने के बाद गुरुवार सुबह शव मिले।
- शिवम की उंगलियां ताऊ के बालों में उलझी थीं।
- राजू की मुट्ठी में भतीजे के पैर थे।
- पार्वती नदी के उफान और तेज बारिश से घटना हुई।
ग्रामीणों की जुबानी
पड़ोसी रूपसिंह ने बताया कि “राजू और शिवम का रिश्ता जितना भावुक था, उतना ही मजबूत भी। दोनों का एक-दूसरे के बिना दिन नहीं कटता था।” वहीं, मुकेश गुर्जर का कहना है कि “हादसे ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। बाढ़ का पानी भले उतर गया हो, पर यह जख्म लंबे समय तक भरेगा नहीं।”
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