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Meta Description: इंदौर कोर्ट के आदेश के बाद एरोड्रम रोड स्थित सुरजीत हुंडई शोरूम को जबरन खाली कराया गया। एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी शोरूम संचालक ने कब्जा छोड़ा नहीं था, कोर्ट ने जमीन मालिक को दिलवाया कब्जा।
इंदौर। मंगलवार को इंदौर की जिला अदालत के आदेश के बाद एरोड्रम रोड स्थित सुरजीत हुंडई के शोरूम को खाली करवा दिया गया। जमीन मालिक परमजीत सिंह छाबड़ा की याचिका पर कार्रवाई करते हुए कोर्ट, पुलिस और प्रशासन की टीम ने शोरूम को पूरी तरह से खाली करवाया और फर्नीचर से लेकर सभी गाड़ियां बाहर निकाल दी गईं।

सुरजीत हुंडई शोरूम, जिसे ईशान ऑटो के नाम से भी जाना जाता है, काफी समय से चर्चा में था क्योंकि इसका संचालन 5 साल की तय अवधि के बाद भी जारी था। यह जमीन एयरपोर्ट क्षेत्र के रहने वाले परमजीत सिंह पम्मी छाबड़ा की थी, जिसे भोपाल निवासी शोरूम संचालक रमेश नेनवानी को लीज पर दिया गया था। दोनों के बीच 5 साल का एग्रीमेंट हुआ था जो 2023 में समाप्त हो चुका था।
एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी रमेश नेनवानी ने शोरूम खाली नहीं किया। उन्होंने न सिर्फ कब्जा बनाए रखा, बल्कि उसी स्थान से हुंडई कारों की बिक्री भी जारी रखी। इसको लेकर छाबड़ा ने कोर्ट में वाद दायर किया और दो साल की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार कोर्ट ने 25 जुलाई को आदेश दिया कि जमीन का कब्जा असली मालिक को सौंपा जाए।

मंगलवार को कोर्ट टीम और पुलिस की मौजूदगी में प्रशासन की कार्रवाई शुरू हुई। करीब 40 हजार वर्गफीट में बने इस शोरूम से चारों मंजिलों पर रखे गए फर्नीचर, दस्तावेज और कारें बाहर निकाली गईं। जमीन मालिक ने बताया कि हर फ्लोर पर करीब 10 हजार वर्गफीट एरिया है, जहां नेनवानी बिना अनुमति के धंधा चला रहे थे।
कार्रवाई के दौरान इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। लोग पूरे घटनाक्रम को देखकर हैरान थे, क्योंकि इतना बड़ा शोरूम इतने समय तक अवैध कब्जे में कैसे रहा। वहीं पुलिस और कोर्ट की सख्ती के कारण शांति बनी रही और बिना किसी विवाद के कार्रवाई पूरी की गई।
छाबड़ा ने मीडिया को बताया कि उन्होंने कई बार व्यक्तिगत रूप से शोरूम खाली करने के लिए नेनवानी से आग्रह किया था, लेकिन वह टालमटोल करते रहे। मजबूरन उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
अब कोर्ट के आदेश से उन्हें अपनी जमीन वापस मिल चुकी है और उन्होंने धन्यवाद दिया कि न्याय व्यवस्था ने उन्हें समय पर राहत दी। उन्होंने आगे किसी और को जमीन किराए पर देने से पहले सख्त शर्तों पर विचार करने की बात भी कही।
वहीं, रमेश नेनवानी की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उन्होंने कोर्ट की कार्रवाई का विरोध नहीं किया और टीम के आने से पहले ही शोरूम आकर कुछ निजी सामान बाहर निकलवा लिया था।
यह मामला शहर में एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है कि कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेकर कैसे लोग अपनी संपत्ति पर दोबारा अधिकार पा सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि एग्रीमेंट खत्म होने के बाद जबरन कब्जा गैरकानूनी माना जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जानकारों के अनुसार, यह केस उन लोगों के लिए सबक है जो बिना नवीनीकरण के या लीज खत्म होने के बाद भी संपत्ति पर कब्जा बनाए रखते हैं। यह घटना यह भी दर्शाती है कि यदि सही दस्तावेज और सबूत हों तो कोर्ट से न्याय अवश्य मिलता है।
सुरजीत हुंडई शोरूम अब पूरी तरह से खाली हो चुका है और जमीन मालिक के अधीन आ चुका है। आगे इस जगह का क्या उपयोग होगा, इसका फैसला आने वाले दिनों में किया जाएगा। फिलहाल कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।
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