
मध्यप्रदेश में न्यायिक और गैर न्यायिक कार्यों के नए विभाजन के चलते राजस्व विभाग के अधिकारी खुलकर विरोध पर उतर आए हैं। बुधवार से तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने अपने सामान्य कार्यों से दूरी बना ली है और सिर्फ आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को कर रहे हैं। भोपाल, इंदौर, उज्जैन सहित कई जिलों में इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है।

राजस्व अधिकारियों का खुला ऐलान: आपदा प्रबंधन छोड़ बाकी काम बंद
6 अगस्त से राजस्व अधिकारियों ने जिलों के मुख्यालयों में उपस्थित रहकर अपने सभी कार्यों को बंद करने का निर्णय लिया है। केवल आपदा प्रबंधन संबंधी कार्य ही किए जा रहे हैं। इसके अलावा सभी अधिकारी अपने सरकारी वाहन विभाग में जमा कर रहे हैं और अपने डिजिटल सिग्नेचर डोंगल सीलबंद करके जिला अध्यक्ष को सौंप रहे हैं।
नई व्यवस्था से जमीन पर कार्य बाधित
विभाजन के तहत अब एक अधिकारी को न्यायिक कार्यों तक सीमित रखा गया है जबकि दूसरा अधिकारी फील्ड में कार्य करेगा। इसका सीधा असर यह है कि फील्ड पर मौजूद अधिकारी न्यायिक कार्य नहीं कर पा रहे हैं और जो न्यायिक कार्य कर रहे हैं, वे फील्ड में नहीं जा रहे। नतीजन, आम जनता के कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
विरोध की जड़ में है ‘कैबिनेट निर्णय’
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि यह निर्णय कैबिनेट स्तर पर लिया गया था। उन्होंने माना कि न्यायालयीन प्रक्रिया और प्रोटोकॉल में पहले काफी समस्याएं आ रही थीं, जिसे दूर करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम सभी तहसीलदारों के लिए अनिवार्य नहीं है, केवल कुछ जिलों में यह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।
12 से बढ़ाकर 21 जिलों तक लागू की गई योजना
शुरुआत में यह न्यायिक-विभाजन 12 जिलों में 3 महीने के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था, लेकिन बाद में इसे 9 और जिलों में लागू कर दिया गया। यही निर्णय राजस्व अधिकारियों के गले नहीं उतर रहा है।
संघ की चेतावनी: पूर्ण वापसी तक विरोध जारी रहेगा
मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार इस निर्णय को पूर्ण रूप से वापस नहीं लेती, तब तक विरोध जारी रहेगा। हालांकि, किसी तरह की सामूहिक छुट्टी या हड़ताल की घोषणा नहीं की गई है। सभी अधिकारी जिला मुख्यालयों में उपस्थित रहेंगे लेकिन नियमित कार्यों से विरत रहेंगे।
प्रभावित जनता, ठप पड़ी रोजमर्रा की प्रक्रिया
फील्ड अधिकारियों के न्यायिक कार्य न करने और न्यायिक अधिकारियों के फील्ड से दूरी बनाने से रजिस्ट्रियों, भूमि सीमांकन, नामांतरण और प्रमाण-पत्र जैसे कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। आम जनता को राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं लेकिन काम नहीं हो रहा।
भोपाल में भी विरोध तेज
राजधानी भोपाल में बैरागढ़, कोलार, एमपी नगर, शहर वृत्त, बैरसिया और टीटी नगर के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने कोर्ट सहित अन्य कार्यों का बहिष्कार किया है। इस कारण कई जरूरी सरकारी कार्य रुक गए हैं। विरोध के स्वर यहां भी स्पष्ट रूप से सुने जा सकते हैं।
सरकार के लिए चुनौती बना राजस्व विभाग का असंतोष
सरकार के इस निर्णय ने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जब अधिकारी ही असहमत हैं, तो प्रशासनिक व्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं। राजस्व विभाग की रीढ़ माने जाने वाले तहसील स्तर के अधिकारी इस तरह विरोध करें, यह सरकार के लिए चिंताजनक है।
स्थिति पर नजर बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और आगे इस व्यवस्था में बदलाव होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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