
रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र के खाकर खेड़ी गांव में स्थित आलोट प्राथमिक स्कूल जर्जर हालत में है, जहां बच्चों की जान हर रोज खतरे में है। छत से प्लास्टर और मलबा गिरना आम बात हो चुकी है, जबकि बारिश में पानी टपकता रहता है। पहली से पांचवीं तक के सभी विद्यार्थी एक ही जर्जर कक्ष में पढ़ते हैं।
- खतरनाक स्थिति में स्कूल भवन
- झालावाड़ जैसी दुर्घटना की आशंका
- शिक्षकों की चिंता और रिपोर्ट
- स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
- प्रदेश भर में जर्जर स्कूलों की स्थिति
खतरनाक स्थिति में स्कूल भवन
स्कूल की छत इतनी जर्जर हो चुकी है कि बच्चों पर मलबा गिरना अब सामान्य बात हो गई है। तीसरी कक्षा के एक छात्र ने बताया कि सीमेंट और रेत उसके ऊपर गिरती है और टीचर केवल इतना कहते हैं कि दूसरी ओर बैठ जाओ। इससे आलोट प्राथमिक स्कूल जर्जर हालत की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
झालावाड़ जैसी दुर्घटना की आशंका
शिक्षक बताते हैं कि उन्हें डर है कि कहीं झालावाड़ जैसी कोई घटना यहां भी न हो जाए। राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की इमारत का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी।
शिक्षकों की चिंता और रिपोर्ट
स्कूल की महिला शिक्षक मंजुलता प्रजापति और पुरुष शिक्षक लगातार जनशिक्षा केंद्र को शिकायतें कर चुके हैं। सात बार लिखित रूप से समस्या उठाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
गांव के सरपंच मनोहर सिंह ने बताया कि उन्होंने भी कई बार नई बिल्डिंग की मांग की है, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। कांग्रेस नेता करण सिंह राठौड़ ने राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो गंभीर हादसा हो सकता है।
प्रदेश भर में जर्जर स्कूलों की स्थिति
आलोट प्राथमिक स्कूल जर्जर हालत में अकेला नहीं है। कमलाखेड़ी, खेजड़िया गुजरान, परवलिया भामा जैसे गांवों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। बारिश के मौसम में कई स्कूल बंद रहते हैं, जिससे शिक्षा प्रभावित होती है।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दिलीप शर्मा ने बताया कि विभाग ने भोपाल मुख्यालय से पत्र प्राप्त किया है जिसमें कहा गया है कि किसी भी जर्जर भवन में कक्षाएं न चलाई जाएं।
हालांकि, इस प्राथमिक स्कूल के लिए अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। छात्रों और शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
यह समाचार MP स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद और भी गंभीर हो जाता है जिसमें प्लास्टर या लीकेज होने पर क्लास नहीं लगाने को कहा गया है।

इस रिपोर्ट का उद्देश्य है कि स्कूल की व्यवस्था में जल्द बदलाव हो, ताकि किसी हादसे से पहले समाधान निकाला जा सके।
रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र के खाकर खेड़ी गांव में स्थित आलोट प्राथमिक स्कूल जर्जर हालत में है, जहां बच्चों की जान हर रोज खतरे में है। छत से प्लास्टर और मलबा गिरना आम बात हो चुकी है, जबकि बारिश में पानी टपकता रहता है। पहली से पांचवीं तक के सभी विद्यार्थी एक ही जर्जर कक्ष में पढ़ते हैं।
- खतरनाक स्थिति में स्कूल भवन
- झालावाड़ जैसी दुर्घटना की आशंका
- शिक्षकों की चिंता और रिपोर्ट
- स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
- प्रदेश भर में जर्जर स्कूलों की स्थिति
खतरनाक स्थिति में स्कूल भवन

स्कूल की छत इतनी जर्जर हो चुकी है कि बच्चों पर मलबा गिरना अब सामान्य बात हो गई है। तीसरी कक्षा के एक छात्र ने बताया कि सीमेंट और रेत उसके ऊपर गिरती है और टीचर केवल इतना कहते हैं कि दूसरी ओर बैठ जाओ। इससे आलोट प्राथमिक स्कूल जर्जर हालत की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
झालावाड़ जैसी दुर्घटना की आशंका
शिक्षक बताते हैं कि उन्हें डर है कि कहीं झालावाड़ जैसी कोई घटना यहां भी न हो जाए। राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की इमारत का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी।
शिक्षकों की चिंता और रिपोर्ट
स्कूल की महिला शिक्षक मंजुलता प्रजापति और पुरुष शिक्षक लगातार जनशिक्षा केंद्र को शिकायतें कर चुके हैं। सात बार लिखित रूप से समस्या उठाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
गांव के सरपंच मनोहर सिंह ने बताया कि उन्होंने भी कई बार नई बिल्डिंग की मांग की है, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। कांग्रेस नेता करण सिंह राठौड़ ने राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो गंभीर हादसा हो सकता है।
प्रदेश भर में जर्जर स्कूलों की स्थिति

आलोट प्राथमिक स्कूल जर्जर हालत में अकेला नहीं है। कमलाखेड़ी, खेजड़िया गुजरान, परवलिया भामा जैसे गांवों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। बारिश के मौसम में कई स्कूल बंद रहते हैं, जिससे शिक्षा प्रभावित होती है।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दिलीप शर्मा ने बताया कि विभाग ने भोपाल मुख्यालय से पत्र प्राप्त किया है जिसमें कहा गया है कि किसी भी जर्जर भवन में कक्षाएं न चलाई जाएं।
हालांकि, इस प्राथमिक स्कूल के लिए अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। छात्रों और शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
यह समाचार MP स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद और भी गंभीर हो जाता है जिसमें प्लास्टर या लीकेज होने पर क्लास नहीं लगाने को कहा गया है।
इस रिपोर्ट का उद्देश्य है कि स्कूल की व्यवस्था में जल्द बदलाव हो, ताकि किसी हादसे से पहले समाधान निकाला जा सके।
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