
ग्वालियर के घाटीगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां बिजली पोल पर मरम्मत कार्य कर रहे 25 वर्षीय बिजलीकर्मी राजेन्द्र कुशवाहा की करंट लगने से मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब उनके सहकर्मी सुनील पाठक ने बिना किसी सूचना के बिजली लाइन को फिर से चालू कर दिया।

कैसे हुआ हादसा?
यह घटना 10 जून की दोपहर की है। राजेन्द्र कुशवाहा को बिजली कटौती के परमिट पर काम करने के निर्देश दिए गए थे। वह निर्धारित समय पर दोपहर 1:30 बजे बिजली के खंभे पर चढ़कर मरम्मत कार्य कर रहे थे। इस दौरान सुनील पाठक, जो उसी क्षेत्र के सब स्टेशन पर तैनात था, ने बिना किसी पूर्व सूचना के लाइन में बिजली सप्लाई चालू कर दी।
प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी
वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बताया कि राजेन्द्र को खंभे से झटका लगा और वह नीचे गिर गया। तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार का आरोप
राजेन्द्र के परिजनों ने इस हादसे के लिए विद्युत विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुनील पाठक ने जानबूझकर लाइन चालू की थी, जिससे जानलेवा हादसा हुआ।
पुलिस जांच और एफआईआर
घाटीगांव थाना प्रभारी जीवनलाल माहौर ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की गई और तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 बीएनएस के तहत सुनील पाठक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जल्द ही उसकी गिरफ्तारी भी की जा सकती है।
क्या है धारा 106 बीएनएस?
यह धारा उन मामलों पर लागू होती है जहां किसी की जान को नुकसान पहुँचाने वाली लापरवाही साबित हो जाती है। यह गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में आती है और दोषी पाए जाने पर कठोर दंड का प्रावधान होता है।
बिजली विभाग की प्रतिक्रिया
बिजली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षण को लेकर नई गाइडलाइन्स जारी किए जाने की भी उम्मीद है।
आउटसोर्सिंग पर उठे सवाल
यह मामला बिजली कंपनियों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों से काम करवाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। अक्सर ऐसे कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण या सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं।
इस हादसे से क्या सबक मिलते हैं?
- प्रत्येक कार्य से पहले बिजली लाइन बंद होने की पुष्टि जरूरी होनी चाहिए।
- संचार का सही माध्यम स्थापित होना चाहिए ताकि किसी भी निर्णय से पहले जानकारी साझा हो।
- सभी कर्मचारियों को ट्रेनिंग और परमिट आधारित सुरक्षा प्रक्रिया से परिचित कराना चाहिए।
यह घटना एक चेतावनी है कि लापरवाही कैसे किसी की जान ले सकती है। समय पर कार्रवाई और बेहतर प्रबंधन से इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है।
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