
ग्वालियर डॉग अटैक की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे आम लोग डरे हुए हैं। हाल ही में ग्वालियर के कंपू क्षेत्र के अबडापुरा में एक पांच वर्षीय मासूम बच्ची पर उस समय स्ट्रीट डॉग ने जानलेवा हमला कर दिया जब वह घर के बाहर खेल रही थी। डॉग ने बच्ची के पैर को अपने जबड़े में दबा लिया और उसे घसीटने लगा। बच्ची की चीख सुनकर तीन युवक दौड़े और किसी तरह उसे छुड़ाया, लेकिन तब तक उसके पैर में गहरा घाव बन चुका था। इस तरह की घटनाएं बता रही हैं कि ग्वालियर में डॉग अटैक प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
बढ़ते डॉग अटैक के आंकड़े
अगर आंकड़ों की बात करें, तो JAH के PSM विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 1 जनवरी से 1 जुलाई 2025 तक करीब 4500 लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। सिर्फ पिछले 10 दिनों में ही 350 लोग अस्पताल पहुंचे हैं। यदि जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और नगर निगम की डिस्पेंसरियों के आंकड़े भी जोड़ें, तो यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। यह साफ दिखाता है कि ग्वालियर में गली कुत्तों का आतंक तेजी से फैल रहा है।
मासूम बच्ची की हालत

घायल बच्ची को तुरंत जयारोग्य अस्पताल (JAH) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके पैर में आधा दर्जन टांके लगाए और बाद में उसे पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की हालत अब स्थिर है, लेकिन मानसिक तौर पर वह सदमे में है। बच्चों पर इस तरह के हमले उनके मानसिक विकास पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।
डॉग बाइट से बचने के लिए विशेषज्ञ की सलाह
डॉग अटैक की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। वहीं, आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषज्ञों की मानें तो डॉग बाइट के तुरंत बाद ये कदम जरूर उठाने चाहिए:
- घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से कम से कम 10 मिनट तक धोएं।
- एंटीसेप्टिक सोल्यूशन लगाएं।
- कोई देसी नुस्खा या मिर्च आदि लगाने से बचें।
- जितनी जल्दी हो सके, नजदीकी अस्पताल में जाकर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाएं।
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक भी रैबीज एक घातक बीमारी है, जिसका इलाज समय रहते ही संभव है। इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।
ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग की बढ़ती संख्या
ग्वालियर नगर निगम की ओर से कुछ अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन उनका असर सीमित नजर आता है। कई इलाकों में स्ट्रीट डॉग की संख्या तेजी से बढ़ी है और इन्हें पकड़कर नसबंदी कराने की प्रक्रिया बहुत धीमी है। लोग शिकायत करते हैं कि कई बार नगर निगम की टीम समय पर नहीं पहुंचती, जिससे खतरा और बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन की जिम्मेदारी
नगर निगम और प्रशासन को चाहिए कि स्ट्रीट डॉग पर लगाम लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें, नसबंदी अभियान तेज करें और जरूरत पड़े तो शेल्टर होम बनाकर कुत्तों को वहां शिफ्ट करें। इसके अलावा, आम लोगों को भी जानकारी दी जानी चाहिए कि वे कैसे खुद को और बच्चों को सुरक्षित रखें।
समाधान की राह
इस रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर में कई बार लोग डॉग को खाना डालने के बाद लापरवाही करते हैं और कुत्तों में आक्रामकता बढ़ जाती है। इसलिए पेट एनजीओ और स्थानीय लोगों को मिलकर जिम्मेदारी संभालनी होगी, ताकि इंसान और जानवर दोनों सुरक्षित रहें।
ग्वालियर डॉग अटैक पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ प्रशासन नहीं, आम लोग भी जागरूक रहें। बच्चों पर नजर रखें, उन्हें अकेला बाहर न छोड़ें और घाव लगने पर देरी न करें। इससे बड़ी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
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