
इंदौर शहर के श्रीनगर एक्सटेंशन इलाके में शनिवार सुबह 6:30 बजे एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। कॉलेज जा रही एक छात्रा पर चार आवारा कुत्तों ने अचानक हमला कर दिया। छात्रा सड़क पर पैदल जा रही थी, तभी दूर से आते हुए झुंड ने उसे घेर लिया।
- घटना का वीडियो सामने आया
- स्थानीय लोगों की मदद
- हमले का कारण क्या?
- नगर निगम की लापरवाही
- कितने लोग हो चुके हैं शिकार?
- समाधान क्या है?
कुत्तों ने उसे गिरा दिया और उसके पैरों में नोंच-नोंच कर काट लिया। छात्रा ने पहले तो साहस दिखाया और उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही पलों बाद वही कुत्ते दोबारा लौट आए और हमला दोहराया।
घटना का वीडियो सामने आया

यह पूरी घटना पास के एक सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्रा किस तरह अकेले कुत्तों से संघर्ष कर रही है और कैसे वो अचानक गिरा दी जाती है। वीडियो में यह भी दिखा कि कैसे कुत्ते बार-बार हमला करने लौटते हैं।
स्थानीय लोगों की मदद
हमले के दौरान छात्रा की एक सहेली, जो स्कूटी पर जा रही थी, रुककर उसकी मदद के लिए आई। उसने गाड़ी रोककर कुत्तों को भगाया और छात्रा को संभाला। छात्रा इतनी घबरा गई थी कि उसे चक्कर आने लगे और वह वहीं बैठ गई।
पास के रहवासी दंपति विशाल और शैफाली अग्रवाल ने छात्रा को अपने घर ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया। उन्होंने बताया कि छात्रा परीक्षा देने जा रही थी, जब यह हमला हुआ।
हमले का कारण क्या?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कारण है आसपास के इलाकों से यहां फेंका जाने वाला बचा हुआ खाना, खासकर नॉनवेज की जूठन।
रात में कुछ कॉलोनियों से लोग यहां खुले में खाद्य सामग्री फेंकते हैं, जिससे कुत्तों का झुंड नियमित रूप से इसी जगह पर इकट्ठा होता है और आक्रामक हो जाता है।
नगर निगम की लापरवाही
स्थानीय लोग कई बार नगर निगम के 311 एप पर शिकायत कर चुके हैं। कुछ बार कचरा तो उठा लिया जाता है, लेकिन जूठन का निस्तारण नहीं होने से कुत्तों की संख्या घटने की बजाय बढ़ रही है। सफाई टीम भी इस अव्यवस्था से परेशान है।
लोगों ने मांग की है कि नगर निगम न सिर्फ कचरे का सही ढंग से निपटान करे बल्कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाए।
कितने लोग हो चुके हैं शिकार?
सरकारी अस्पतालों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंदौर में पिछले 6 महीनों में करीब 24,000 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं। यह एक भयावह आंकड़ा है। हालांकि अधिकतर को समय रहते एंटी रैबीज टीका मिल गया, फिर भी डर का माहौल बना हुआ है।
हर हफ्ते सैकड़ों केस
सिर्फ जुलाई महीने में ही अब तक हजारों केस दर्ज हो चुके हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
समाधान क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खुले में भोजन फेंकने पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा और आवारा कुत्तों की नसबंदी की गति नहीं बढ़ेगी, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
साथ ही, नगर निगम को चाहिए कि प्रत्येक वार्ड में गश्त टीम तैनात की जाए जो तुरंत आवारा कुत्तों को पकड़कर पशु विभाग को सौंपे।
लोगों की अपील
रहवासियों की ओर से अपील की गई है कि लोग खुद भी जागरूक हों और जूठन या कचरा खुले में फेंकने से बचें। इस समस्या का समाधान केवल प्रशासन ही नहीं, आम जनता के सहयोग से ही संभव है।
इंदौर में आवारा कुत्तों का आतंक अब आम समस्या बनता जा रहा है। ताजा मामला बेहद चिंताजनक है और तत्काल समाधान की मांग करता है। अगर प्रशासन और जनता मिलकर प्रयास करें, तो इस समस्या से जल्द ही निजात पाई जा सकती है।

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