
“कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने मुरैना में एक विवादित बयान देकर सियासी माहौल गरमा दिया। कांग्रेस प्रत्याशी सत्यपाल सिकरवार ने मंत्री पर राजनीतिक डर में ऐसा बोलने का आरोप लगाया है।”
सामग्री सूची

क्या कहा मंत्री ने?
कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना का मुरैना जिले के काशीपुर गांव में दिया गया बयान सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस प्रत्याशी को जीतवा देते और कोई गाली देता तो वो गड़ा हुआ पत्थर नहीं उखाड़ते, बगल में रखा कट्टा निकालकर सीधा मार देते।” इस बयान का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
कंषाना ने यह भी कहा कि उनके सांसद ठाकुर जाति के हैं, लेकिन स्वभाव से बनिया जैसे हैं। वो अगर कोई अपशब्द भी सुने, तो शांति से समाधान निकालते हैं।
कार्यक्रम का संदर्भ
यह बयान शुक्रवार को उस वक्त दिया गया जब मंत्री कंषाना सांसद शिवमंगल सिंह तोमर के साथ मुरैना पहुंचे थे। काशीपुर गांव में एक चौपाल निर्माणकार्य के भूमिपूजन के मौके पर आयोजित आमसभा में उन्होंने ये बातें कहीं। यह चौपाल 50 लाख रुपए की लागत से बन रही है।
मंच से दिया गया विवादित बयान
कार्यक्रम में उन्होंने कहा – “शिवमंगल सिंह जी, मुझे आपकी गारंटी देने की जरूरत नहीं, आप खुद गारंटर हैं। जो कांग्रेस से चुनाव लड़ा, अगर वो जीत जाता और कोई उसे गाली देता तो बगल में रखा कट्टा निकाल देता।” इस बयान के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में भी असहजता देखी गई।

कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस प्रत्याशी सत्यपाल सिंह नीटू सिकरवार ने मंत्री के बयान को अराजकता फैलाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि मंत्री की भाषा से उनका चाल, चरित्र और चेहरा उजागर होता है। हाल ही में भाजपा द्वारा पचमढ़ी में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में मंत्री-विधायकों को मर्यादित व्यवहार सिखाया गया था, लेकिन मंत्री कंषाना ने उससे कुछ नहीं सीखा।
राजनीतिक डर का आरोप
सिकरवार ने आरोप लगाया कि कंषाना उनके खिलाफ चुनावी इतिहास के कारण डरे हुए हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पिता और मंत्री जी के बीच सुमावली विधानसभा में चुनावी मुकाबले हुए हैं, जिससे वह मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्हें डर है कि कहीं सुमावली क्षेत्र उनके हाथ से न निकल जाए।”
राजनीतिक बैकग्राउंड
मुरैना लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी सत्यपाल सिंह को भाजपा के शिवमंगल सिंह तोमर ने हाल ही में हुए चुनाव में 50,620 वोटों से हराया था। माना जा रहा है कि मंत्री के बयान उसी परिप्रेक्ष्य में आए हैं।
कंषाना लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं और राज्य सरकार में कृषि मंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं। लेकिन उनके बयानों को लेकर अक्सर विवाद होते रहे हैं।
मंत्री के पुराने बयान
यह पहला मौका नहीं है जब कंषाना का बयान विवादों में आया हो। इससे पहले भी खाद संकट पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा था, “डिस्ट्रीब्यूशन सहकारिता विभाग का काम है।” इस बयान को लेकर विपक्ष ने उनकी जानकारी और जिम्मेदारी पर सवाल उठाए थे।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने भी टिप्पणी की थी कि “ऐसे अल्पज्ञान वाले मंत्री ही जब राज्य में विभाग संभालते हैं तो समस्याएं बढ़ती हैं।”
कृषि मंत्री का यह बयान आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। जहां एक ओर विपक्ष इसे अराजकता और असंवेदनशीलता की मिसाल बता रहा है, वहीं भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर मुख्यमंत्री या पार्टी आलाकमान की क्या प्रतिक्रिया आती है। लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव बाद भी मुरैना की राजनीति में गर्मी बरकरार है।
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