
मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के खुड़ैल क्षेत्र स्थित एक सरकारी स्कूल में नाबालिग छात्राओं के शोषण और उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल के दो शिक्षकों पर छात्राओं के साथ अश्लील टिप्पणियां करने, मारपीट करने और अमानवीय व्यवहार करने का आरोप है। खास बात यह है कि मामला करीब 9 साल पुराना होने के बावजूद अब तक किसी थाने में एफआईआर तक दर्ज नहीं हो सकी है। इंदौर की अन्य खबरें यहां देखें।
एसडीएम रिपोर्ट ने खोली पोल
स्कूल में छात्राओं के साथ अशोभनीय व्यवहार की पुष्टि महिला एसडीएम नीता राठौर की जांच में हुई। उन्होंने 2016 में इस मामले की जांच शुरू की और छात्राओं के बयान दर्ज किए। रिपोर्ट में छात्राओं ने बताया कि शिक्षक छुट्टी मांगने पर पेशाब करने के लिए बोतलें थमाते थे और गंदे कमेंट पास करते थे। बाल खींचने, गालियां देने और पढ़ाई के दौरान काम करवाने जैसे आरोप भी लगे।

शिकायत और जांच का सिलसिला
समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र सिंह यादव ने 6 मई 2016 को इंदौर पुलिस अधीक्षक, महिला थाना और खुड़ैल थाने में लिखित शिकायत दी थी। आरोपों में कहा गया कि शिक्षकों ने बच्चियों से मिर्च, तेल और सब्जी मंगवाई, और अश्लील शब्दों का प्रयोग किया। इसके बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
स्टाफ और प्रिंसिपल ने लगाए आरोप
इसी रिपोर्ट में स्कूल के अन्य सहायक शिक्षकों और प्रिंसिपल ने भी दोनों शिक्षकों के व्यवहार को गलत बताया। उन्होंने स्वीकारा कि आरोपी शिक्षक स्कूल से गायब रहते हुए भी फर्जी हाजिरी लगाते थे। कई छात्राओं ने बयान दिया कि पढ़ाई के समय भी शारीरिक प्रताड़ना की जाती थी।
बर्खास्तगी की सिफारिश, FIR फिर भी नहीं
एसडीएम नीता राठौर ने 10 नवंबर 2019 को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें दोनों शिक्षकों को मानसिक रूप से विकृत बताते हुए तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की सिफारिश की गई। लेकिन न तो महिला थाना और न ही खुड़ैल पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। शिकायतकर्ता ने 2020 में रिमाइंडर भी भेजा, लेकिन स्थिति जस की तस रही।
PMO तक पहुंचा मामला
एफआईआर दर्ज नहीं होने पर छात्राओं और परिजनों में नाराजगी थी। इसी कारण कुमारी सपना प्रजापति ने 28 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय में ‘डिमांड ऑफ जस्टिस’ याचिका भेजी। PMO ने मामले को गंभीर मानकर सीएम हेल्पलाइन डायरेक्टर को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका की तैयारी
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत मिली रिपोर्ट में सारे आरोप स्पष्ट हैं। इसके बावजूद एफआईआर का पंजीयन नहीं हुआ, इसीलिए अब जनहित याचिका दाखिल की जाएगी।
कानूनी पहलू और पुलिस की भूमिका
एडवोकेट डॉ. रूपाली राठौर ने कहा कि दोनों शिक्षकों को शांति भंग की आशंका में एक-एक लाख के बॉन्ड पर छोड़ा गया, लेकिन पुलिस ने अपराध दर्ज नहीं किया। ऐसे मामलों में पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
महिला सुरक्षा के सवाल
नाबालिग छात्राओं के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद निंदनीय है। समाज में बेटियों की सुरक्षा को लेकर भरोसा टूटता है। यदि आप या कोई भी लड़की शोषण का शिकार हो, तो तुरंत राष्ट्रीय महिला आयोग या चाइल्डलाइन पर शिकायत करें।
समाज की जिम्मेदारी
स्कूल में नाबालिग बच्चियों के शोषण जैसे गंभीर मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अभिभावकों, शिक्षकों और प्रशासन को मिलकर ऐसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई करनी होगी ताकि दोबारा कोई बच्ची ऐसी स्थिति में ना फंसे।
लेखक: Times of MP न्यूज टीम
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