
इंदौर में 7 साल के मासूम को 18 साल का दिखाकर जमीन हथियाने का घोटाला सामने आया है। 28 साल पुराने इस मामले में अब जाकर हाईकोर्ट के आदेश पर केस दर्ज हुआ है।
- 28 साल बाद उजागर हुआ घोटाला
- 7 साल के बच्चे के नाम पर पट्टा
- लीज रिन्यू में भी हेरफेर
- गैरकानूनी तरीके से लीज ट्रांसफर
- हाईकोर्ट के आदेश और केस
- घोटाले की पूरी समयरेखा
- लोकायुक्त की जांच और बयान
इंदौर जमीन घोटाला की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। 1997 में जिस बच्चे की उम्र महज 7 साल थी, उसे दस्तावेजों में 18 साल का बताकर खनिज विभाग ने लीज दे दी। यह मामला वर्षों तक दबा रहा लेकिन हाल ही में हाईकोर्ट के निर्देश पर इसकी परतें खुल गईं।
28 साल बाद उजागर हुआ घोटाला
यह मामला 1997 का है जब दीपक वर्मा नामक नाबालिग के नाम पर क्रशर प्लांट के लिए 9 एकड़ जमीन की लीज जारी की गई। हैरानी की बात यह है कि आधार कार्ड के मुताबिक दीपक का जन्म 1990 में हुआ था, लेकिन 1997 में उसने खुद को 18 साल का बताकर जमीन की लीज मांगी।
7 साल के बच्चे के नाम पर पट्टा
आवेदन के समय दीपक की उम्र वास्तव में 7 साल थी, लेकिन दस्तावेजों में उम्र 18 बताई गई। खनिज विभाग के अधिकारियों ने बिना सत्यापन के लीज जारी कर दी। यह साफ तौर पर दस्तावेजी धोखाधड़ी और विभागीय मिलीभगत का मामला है।
लीज रिन्यू में भी हेरफेर
2008 में जब लीज रिन्यू का आवेदन किया गया, तब भी दस्तावेजों की जांच नहीं की गई। आवेदन में उम्र 19 साल दर्ज थी, जबकि 1997 से 2008 तक 11 साल का अंतर था। यह स्पष्ट करता है कि अधिकारियों ने जानबूझकर तथ्यों की अनदेखी की।
गैरकानूनी तरीके से लीज ट्रांसफर
2017 में दीपक वर्मा ने पूरी लीज शमा खान को बेच दी। इसके लिए विभागीय अनुमति नहीं ली गई। फिर भी 2018 में लीज शमा खान के नाम रिन्यू हो गई। यह रिन्यूवल भी नियमों के विरुद्ध था, क्योंकि विभाग से कोई लिखित स्वीकृति नहीं ली गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश और केस
जब इस जमीन से जुड़ा दूसरा खनन विवाद सामने आया तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने पाया कि लीज ट्रांसफर और रिन्यू प्रक्रिया अवैध थी। इसी के आधार पर कोर्ट ने 5 अप्रैल 2024 को आदेश दिया कि सभी दोषियों पर कार्रवाई हो।
घोटाले की पूरी समयरेखा
- 1997: 7 साल के दीपक वर्मा के नाम पर 9 एकड़ की लीज मंजूर।
- 2008: लीज रिन्यू का आवेदन, उम्र 19 साल दर्शाई गई।
- 2017: दीपक वर्मा ने शमा खान को पूरी लीज बेच दी।
- 2018: शमा खान के नाम पर लीज रिन्यू हो गई, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध था।
लोकायुक्त की जांच और बयान

लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर केस दर्ज कर लिया गया है। अब यह जांच की जा रही है कि किन अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस अवैध प्रक्रिया में भूमिका निभाई। जांच पूरी होने पर नामजद आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या?
यह मामला एक नजीर है कि किस तरह सरकारी दस्तावेजों में गड़बड़ी करके बेशकीमती जमीन हड़पी जाती है। इस केस के खुलासे से प्रशासन में खलबली मच गई है और उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
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