
जर्जर स्कूल जबलपुर संभाग में गंभीर खतरा बन चुके हैं। 639 सरकारी स्कूल बच्चों के बैठने लायक नहीं बचे, कहीं प्लास्टर गिर रहा तो कहीं पानी भरा है। जानें पूरी रिपोर्ट।

जर्जर स्कूल जबलपुर संभाग में अब छात्रों की पढ़ाई खतरे में पड़ चुकी है। संभाग के 639 स्कूल भवन ऐसे हैं, जो न सिर्फ जर्जर हो चुके हैं बल्कि बच्चों की जान के लिए खतरा बन चुके हैं। कई स्कूलों की छतें गिरने की स्थिति में हैं, कहीं कक्षाओं में पानी भर जाता है, तो कहीं किताबें सुखाने के लिए बच्चों को रस्सियों का सहारा लेना पड़ता है।
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट ने खोली हकीकत
राजस्थान के झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे के बाद मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में स्कूलों की समीक्षा की। जबलपुर संभाग की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए।
15,689 सरकारी स्कूलों में से 689 भवन पूरी तरह जर्जर पाए गए हैं। इनमें से अधिकांश स्कूल 30 साल से ज्यादा पुराने हैं।
इन जिलों में सबसे बुरा हाल
रिपोर्ट के अनुसार सिवनी और जबलपुर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां स्कूलों की इमारतें बच्चों के बैठने के लायक नहीं रह गई हैं। वहीं डिंडौरी और मंडला जिले से रिपोर्ट मिली कि यहां एक भी जर्जर स्कूल नहीं है, जो हैरानी की बात है।
| जिला | कुल सरकारी स्कूल | जर्जर स्कूल |
|---|---|---|
| सिवनी | 1987 | 145 |
| जबलपुर | 2254 | 127 |
| छिंदवाड़ा | 2156 | 93 |
| बालाघाट | 2012 | 89 |
| नरसिंहपुर | 1980 | 65 |
| कटनी | 1865 | 60 |
| डिंडोरी | 1745 | 0 |
| मंडला | 1690 | 0 |
स्कूलों की हालत – ग्राउंड रिपोर्ट
जर्जर स्कूल जबलपुर संभाग की स्थिति जानने के लिए दैनिक भास्कर ने तीन प्रमुख स्कूलों का निरीक्षण किया।
1. इंदिरा नगर, बरगी: रस्सी पर सूख रही किताबें
इस प्राइमरी स्कूल में बारिश का पानी कक्षाओं में घुस जाता है। लाइब्रेरी की किताबें भीग चुकी हैं। बच्चों को किताबें सुखाने के लिए कमरे के अंदर रस्सियां बांधनी पड़ती हैं। भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
2. बिलपुरा स्कूल: कक्षाएं बाहर लगती हैं
यह एकीकृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बारिश के दिनों में पूरी तरह बेकार हो जाता है। कक्षाओं में पानी भर जाता है, जिससे छात्रों को या तो घर में रहना पड़ता है या स्कूल के बाहर क्लास लगती है।

3. घमापुर स्कूल: छत से गिरता प्लास्टर
यह प्राथमिक शाला छात्रों के लिए जानलेवा बन गई है। छत से प्लास्टर के टुकड़े लगातार गिरते हैं। दो कमरे पूरी तरह खराब हो चुके हैं, बाकी दो भी कभी भी बंद हो सकते हैं।
शिक्षकों की शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।

जॉइंट डायरेक्टर के निर्देश: वैकल्पिक व्यवस्था करें
स्कूल शिक्षा विभाग के जॉइंट डायरेक्टर ने सभी DEO को निर्देश दिए हैं कि जर्जर स्कूलों में कक्षा संचालन बंद किया जाए और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इन हालातों में यह सवाल उठता है कि बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करवाना कहां तक उचित है?
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सरकार को सुरक्षित भवन देना अनिवार्य है, लेकिन यहां तो कई स्कूलों में जानलेवा स्थिति बन चुकी है।
शिक्षकों की स्थिति: दफ्तरों में अटैच
मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने 18 अप्रैल को स्पष्ट किया था कि शिक्षकों को स्कूल में ही होना चाहिए, न कि सरकारी दफ्तरों में।
इसके प्रदेश में 15 हजार से अधिक शिक्षक अलग-अलग दफ्तरों में अटैच हैं।
एमपी में शिक्षकों की अटैचमेंट रिपोर्ट
जरूरी कदम और सुधार
सरकार को चाहिए कि प्राथमिकता के आधार पर इन स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण करवाया जाए। बच्चों की पढ़ाई और जीवन दोनों ही अहम हैं।
शिक्षा विभाग को हर जिले में सक्रिय निरीक्षण करना होगा और बजट की त्वरित मंजूरी देनी होगी।
भारत सरकार स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर नीति
जबलपुर संभाग के 639 जर्जर स्कूल बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं। अब जरूरत है त्वरित निर्णय लेने की, ताकि कोई हादसा ना हो और भविष्य की पीढ़ी भयमुक्त होकर पढ़ सके।
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