
मध्यप्रदेश के हरदा जिले में करणी सेना कार्यकर्ताओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में शुक्रवार को उज्जैन में करणी सेना ने जोरदार प्रदर्शन किया। करणी सेना प्रदर्शन उज्जैन का नेतृत्व करते हुए कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
हरदा में करणी सेना द्वारा किए जा रहे विरोध को दबाने के प्रयास में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में यह आंदोलन खड़ा किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह पूरी तरह असंवैधानिक और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ था।
मुख्य मांगे और ज्ञापन सौंपना
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं:
- हरदा कलेक्टर और एसपी को तुरंत हटाया जाए
- पुलिसकर्मियों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाए
- करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवनसिंह शेरपुर को सुरक्षा प्रदान की जाए
दशहरा मैदान से रैली
कोठी रोड स्थित कलेक्टर कार्यालय तक रैली का आयोजन दशहरा मैदान से किया गया, जिसमें राजपूत समाज और सर्व समाज के प्रतिनिधियों की बड़ी भागीदारी रही। रैली में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों का उत्साह देखने को मिला।
प्रशासन की तैयारियां
प्रदर्शन को लेकर प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर कार्यालय पर भारी पुलिस बल तैनात किया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
शैलेन्द्र सिंह का बयान
करणी सेना नेता शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि हरदा की घटना लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। यदि सरकार ने समय रहते मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के निहितार्थ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रदर्शन से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। यह आंदोलन मध्यप्रदेश में हो रहे अन्य जातिगत आंदोलनों से भी जुड़ सकता है।
जनता की प्रतिक्रिया
सामान्य जनता ने भी करणी सेना के शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन किया। कुछ लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
आंदोलन की अगली रणनीति
सूत्रों के अनुसार, यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो करणी सेना अगले सप्ताह भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बना रही है। इसमें प्रदेश के कोने-कोने से कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना है।
उज्जैन का यह प्रदर्शन सिर्फ हरदा की घटना के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी प्रश्न खड़ा करता है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन मध्यप्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
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