
मंदसौर गैंगरेप फांसी सजा बहाली को लेकर शुक्रवार को मंदसौर में जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। 7 वर्षीय मासूम बच्ची से दरिंदगी करने वाले दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के विरोध में सर्व समाज ने विशाल रैली निकाली और शहर बंद करा दिया।

2018 में हुई इस हृदयविदारक घटना में पहले सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर मामला वापस निचली अदालत भेज दिया। इसके बाद मंदसौर कोर्ट ने 30 जून को उम्रकैद का फैसला सुना दिया, जिसने पूरे शहर को आक्रोशित कर दिया।
सर्व समाज ने सरकार से की फांसी बहाली की अपील
शुक्रवार दोपहर आजाद चौक से शुरू हुई मौन रैली घंटाघर, गांधी चौराहा, बीपीएल चौराहा होते हुए पुलिस कंट्रोल रूम पहुंची। यहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में साफ लिखा गया कि 7 साल की मासूम को न्याय तभी मिलेगा जब दोषियों को फांसी की सजा दोबारा दी जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और वरिष्ठ अधिवक्ता से मजबूत पैरवी कराने की मांग रखी।
व्यापारियों और नागरिकों का समर्थन
शहर में अधिकतर दुकानें बंद रहीं। करीब 1500 लोग इस रैली में शामिल हुए, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी थे। व्यापारियों ने भी इस बंद का समर्थन किया।
सर्व हिंदू समाज के संयोजक विनय दुबेला ने कहा, “यदि दोषियों को फांसी नहीं दी गई तो यह पूरे समाज के लिए गलत संदेश होगा। फांसी की सजा ही न्यायसंगत है।”
प्रशासन का जवाब
एसडीएम शिवलाल शाक्य ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगें उचित मंच तक पहुंचाई जाएंगी ताकि न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़े।
फांसी की सजा ही न्याय क्यों?
26 जून 2018 को मंदसौर में 7 साल की मासूम के साथ बर्बर दुष्कर्म के बाद उसका जीवन लगभग तबाह हो गया। ऐसे दरिंदों को उम्रभर जेल में रखने की बजाय फांसी देना ही समाज में कठोर संदेश पहुंचाएगा। इसी को लेकर बार-बार लोग सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के तकनीकी आधार पर निचली अदालत भेजे फैसले को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब हाईकोर्ट ने फांसी की सजा दी थी, तो ट्रायल कोर्ट का उसे उम्रकैद में बदलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
न्याय की उम्मीद
फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर लिया है और आगे की कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। लेकिन लोगों की भावनाओं को देखते हुए साफ है कि वे दोषियों को फांसी की सजा बहाल होने तक शांत नहीं बैठने वाले।
आप यहां मंदसौर के अन्य अपडेट भी देख सकते हैं।




मंदसौर गैंगरेप फांसी सजा बहाली की मांग आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 2018 में थी। समाज का भरोसा तभी बहाल होगा जब न्याय सख्ती से लागू होगा और दोषियों को फांसी दी जाएगी।
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