
NEET रिजल्ट डिप्रेशन: ग्वालियर शहर के शताब्दीपुरम इलाके में मंगलवार रात एक हृदयविदारक घटना घटी, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। 18 साल के निखिल प्रताप राठौर ने NEET रिजल्ट डिप्रेशन के चलते खुद को गोली मार ली। बताया जा रहा है कि NEET की उत्तर कुंजी (Answer Key) देखने के बाद उसे लगा कि उसके नंबर उसकी उम्मीद से काफी कम हैं, जिससे वह मानसिक तनाव में आ गया।
घटना का विवरण
मंगलवार रात लगभग 8 बजे जब घर में सभी सदस्य मौजूद थे, तब निखिल नीचे के कमरे में गया और अपने पिता की लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार ली। फायरिंग की आवाज सुनते ही माता-पिता भागते हुए नीचे पहुंचे। उन्होंने तुरंत निखिल को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
छात्र का पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

निखिल राठौर एक मेहनती और अनुशासित छात्र था। उसके पिता बृजभान सिंह राठौर सेना से रिटायर्ड हैं और बड़े भाई बीटेक कर रहे हैं। परिवार में शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती थी। निखिल का सपना डॉक्टर बनना था और वह लंबे समय से NEET की तैयारी में लगा हुआ था। लेकिन जब NEET रिजल्ट डिप्रेशन का दबाव उस पर हावी हुआ, तो उसने यह गंभीर कदम उठा लिया।
पुलिस की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही महाराजपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पिस्टल को जब्त कर लिया गया। सीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि प्राथमिक जांच में मामला NEET रिजल्ट डिप्रेशन से प्रेरित आत्महत्या का लग रहा है, हालांकि हर पहलू से जांच की जा रही है।
समुदाय में शोक और चिंता
शताब्दीपुरम इलाके में इस घटना के बाद शोक की लहर दौड़ गई। पड़ोसी और जानने वाले निखिल को एक बेहद शांत और पढ़ाई में रुचि रखने वाला छात्र बताते हैं। इस हादसे ने न केवल उसके परिवार, बल्कि पूरे मोहल्ले को मानसिक रूप से झकझोर दिया है।
NEET और डिप्रेशन का बढ़ता प्रभाव
NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों को लेकर छात्रों में NEET रिजल्ट डिप्रेशन की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी भोपाल AIIMS और कोटा जैसे शैक्षणिक हब में इस प्रकार की आत्महत्याएं सामने आ चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में असफलता को जीवन की असफलता मानना छात्रों में गंभीर मानसिक समस्याओं को जन्म देता है। जरूरत है कि NEET रिजल्ट डिप्रेशन को सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर समझा जाए और समय रहते समाधान की ओर कदम उठाए जाएं।
मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता
“परिणाम की बजाय प्रयास को महत्व देना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि वे किसी भी मानसिक दबाव को साझा कर सकें।”
— डॉ. नेहा अग्रवाल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है। स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में मेंटल हेल्थ काउंसलिंग को अनिवार्य किया जाना चाहिए
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