

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। मालेगांव विस्फोट मामले में निर्दोष घोषित की गईं पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनसे इन नेताओं के नाम लेने का दबाव बनाया गया था।
टॉर्चर कर मोदी और योगी का नाम लेने को कहा
साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। जांच अधिकारी चाहते थे कि मैं नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत, योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं का नाम लेकर उन्हें ब्लास्ट से जोड़ दूं।”
फेफड़ों पर असर पड़ा, अस्पताल में हिरासत
प्रज्ञा ठाकुर ने आरोप लगाया कि टॉर्चर इतना भयानक था कि उनके फेफड़े जवाब देने लगे। उन्हें अस्पताल में अवैध रूप से रखा गया। इसके बावजूद उन्होंने असत्य नहीं बोला।
NIA कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी
31 जुलाई 2025 को NIA की स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
मालेगांव ब्लास्ट क्या था?
29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल में लगे बम से धमाका हुआ था। इस विस्फोट में छह लोगों की मौत और 101 घायल हुए थे। सात आरोपियों पर यूएपीए, हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा चला।
जांच पर उठे गंभीर सवाल
साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि एटीएस के कई अधिकारियों ने कानून के नाम पर गैरकानूनी कार्य किए। उन्होंने कहा, “मुझसे बहुत कुछ कहलवाना चाहा गया, लेकिन मैंने सत्य नहीं छोड़ा।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य की राह
साध्वी प्रज्ञा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल है। विपक्ष इसे एजेंसी के दुरुपयोग का मामला बता रहा है, वहीं समर्थक इसे न्याय की जीत कह रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या सिर्फ आरोप लगाकर किसी की ज़िंदगी बर्बाद की जा सकती है? यह मामला न्याय व्यवस्था के लिए एक सबक है।
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