

रतलाम भीम आर्मी ज्ञापन
रतलाम भीम आर्मी ज्ञापन: रतलाम जिले के नामली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कांडरवासा गांव में हुई एक नाबालिग आयुष मालवीय की हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
भीम आर्मी के प्रदेश पदाधिकारियों ने गुरुवार को रतलाम पहुंचकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश खाखा को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें जांच को आईपीएस स्तर के अधिकारी से कराए जाने की मांग की गई। उन्होंने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की।
एफआईआर में लापरवाही के आरोप
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत को दरकिनार कर आरोपी की बेटी को फरियादी बना दिया। उन्होंने इसे पुलिस की निष्पक्षता पर सवालिया निशान बताया और इसे आरोपी पक्ष को संरक्षण देने
परिजनों से की मुलाकात, सांत्वना दी
प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले कांडरवासा गांव पहुंचकर आयुष मालवीय के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद वे अनिल मालवीय (आयुष के बड़े भाई) को साथ लेकर रतलाम एसपी अमित कुमार से मिलने पहुंचे। चूंकि एसपी कार्यालय में नहीं थे, उन्होंने एएसपी को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधियों में शामिल
- सुनील अस्तेय – पूर्व प्रदेश अध्यक्ष
- नीरज चंसोरिया – प्रदेश महासचिव
- विक्रम नावटिया – जिला अध्यक्ष
- गोवर्धन परमार
- रामचंद्र प्रजापत
- महेश मालवीय
- किशोर राव आजाद मेव
- राहुल दुलगज
- बसंती बाई
- अंगुरबाला
हत्या को बताया ऑनर किलिंग
सुनील अस्तेय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह एक सोची-समझी ऑनर किलिंग है। आयुष के पिता पुलिस थाने पर मौजूद थे, इसके बावजूद उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। यदि स्थानीय प्रशासन न्याय नहीं दिला पाता है, तो भीम आर्मी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी।
पुलिस की अब तक की कार्रवाई
एएसपी राकेश खाखा के अनुसार, अब तक कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में दिलीप पिता दातार सिंह को भी पकड़ा गया है। मामले की विवेचना फिलहाल जारी है और भीम आर्मी द्वारा उठाई गई सभी मांगों की भी जांच की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
कांडरवासा निवासी आयुष मालवीय शुक्रवार रात अपनी प्रेमिका से मिलने मेवासा गांव गया था। वहां लड़की के परिजनों ने उसे पकड़ लिया, बाल मुंडवा दिए और पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा। गंभीर रूप से घायल आयुष की वहीं मृत्यु हो गई।
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने शव को फोरलेन मार्ग पर रखकर प्रदर्शन किया और सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके बाद नामली थाना प्रभारी एसआई आरके चौहान को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया।
सामाजिक संगठनों की भूमिका
यह मामला सिर्फ आपराधिक घटना नहीं बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विफलता का उदाहरण भी है। भीम आर्मी जैसी सामाजिक संस्थाएं इन घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभाकर पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के प्रयास कर रही हैं।
यह घटना यह स्पष्ट करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी है। पीड़ितों को न्याय दिलाने में प्रशासनिक निष्पक्षता और सामाजिक सक्रियता दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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