
निवेश का सपना बना धोखा:रतलाम की एक अदालत ने BN Gold Limited के निदेशक सचिन डामोर को निवेशकों से धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार देते हुए 7 साल की सश्रम कारावास और 15 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला रतलाम के द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाया।

कैसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा?
शहर के डीडी नगर थाना क्षेत्र के निवासी कृष्णदास ने 28 अगस्त 2016 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि BN Gold लिमिटेड नामक कंपनी ने 5 वर्षों में निवेश की गई राशि का डेढ़ गुना लौटाने
कंपनी ने निवेश के नाम पर लाखों की ठगी की। पैसा डबल करने का सपना दिखाया, लेकिन सभी आरोपी दफ्तर बंद कर फरार हो गए।
चार आरोपी हुए बरी
पुलिस ने मामले में सचिन डामोर सहित हीरालाल, मनिंदर, आशीषसंदीप के खिलाफ मामला दर्ज किया था। लेकिन अदालत ने सबूतों के अभाव में हीरालाल, मनिंदर, आशीष और संदीप को बरी
कोर्ट का फैसला और तर्क
न्यायालय ने माना कि कंपनी ने जानबूझकर जनता को लुभावने वादों से फंसाया और पैसे जमा करवाए। डायरेक्टर के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किए गए। इस आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और अन्य धाराओं के तहत सजा सुनाई गई।
सुनवाई की मुख्य बातें:
- शिकायतकर्ता के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट में पेश हुए।
- कंपनी द्वारा जारी निवेश प्रमाण पत्र भी जब्त किए गए।
- सचिन डामोर को मुख्य षड्यंत्रकर्ता माना गया।
- अन्य आरोपी ठोस साक्ष्य के अभाव में छूटे।
प्रभावित निवेशकों की कहानी
शहर के कई मध्यमवर्गीय परिवार और रिटायर्ड कर्मचारी अपनी जमा पूंजी लेकर इस स्कीम में शामिल हुए थे। एक पीड़ित रामकृष्ण वर्मा ने बताया, “मैंने 5 लाख रुपये निवेश किए थे। कंपनी ने कहा था कि 5 साल में साढ़े सात लाख मिलेंगे, लेकिन कुछ भी वापस नहीं मिला।”
भविष्य में निवेश के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से आम जनता को सबक लेना चाहिए। बिना जांच-पड़ताल और SEBI/ RBI अप्रूव्ड कंपनियों में ही निवेश करें। लालच में आकर पैसा लगाना भारी नुकसान कर सकता है।
लोक अभियोजन की भूमिका
इस केस में अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए मजबूत तर्क दिए और पीड़ितों की ओर से साक्ष्य पेश किए।
न्याय व्यवस्था में भरोसा बढ़ा
इस फैसले के बाद शहर में न्याय प्रणाली पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है। कई निवेशक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं और आशा कर रहे हैं कि अन्य आरोपी भी जल्द कानून की गिरफ्त में होंगे।
रतलाम की अदालत का यह फैसला न सिर्फ एक महत्वपूर्ण न्यायिक उदाहरण है, बल्कि यह उन सभी निवेशकों के लिए सबक है जो बिना सोचे-समझे निवेश करते हैं। सरकार और जांच एजेंसियों को भी इस तरह की कंपनियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
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