
रतलाम में न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के विभाजन को लेकर राजस्व अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार से रतलाम जिले के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के चलते प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। अधिकारी अब केवल आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों में भाग लेंगे।
धरना स्थल बना कलेक्ट्रेट परिसर, टेंट-तंबू के नीचे अधिकारियों का विरोध
कलेक्ट्रेट परिसर में टेंट-तंबू लगाकर तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने धरना शुरू कर दिया है। पहले दिन ही प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और शासन की दोहरी नीति पर गहरा आक्रोश जताया। इस हड़ताल को राजस्व निरीक्षक, पटवारी संघ और अधिवक्ताओं का भी समर्थन मिला है।

प्रशासनिक काम ठप, आम लोगों को हो रही परेशानी
हड़ताल के चलते आमजन के लिए जरूरी दस्तावेज जैसे आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और भूमि विवाद संबंधी कार्य रुक गए हैं। इससे जिले भर में प्रशासनिक गतिविधियां थम गई हैं। तहसीलदारों ने शासकीय वाहन भी जमा करा दिए हैं, जिससे सरकार को कड़ा संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।
विभाजनकारी नीति को बताया अव्यवहारिक
सैलाना के प्रभारी तहसीलदार कूलभूषण शर्मा ने स्पष्ट कहा कि राज्य शासन द्वारा लागू की गई न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों की विभाजन नीति पूरी तरह अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि जब सरकार विकेंद्रीकरण की बात कर रही है, तब यह नीति ग्रामीणों को परेशान करने वाली है। इस निर्णय से तहसीलों की संख्या कम हो जाएगी और ग्रामीणों को दूर-दूर तक जाना पड़ेगा।

प्रशासन को दिए ये सुझाव
तहसीलदारों का कहना है कि अगर सरकार राजस्व व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है, तो उसे तकनीकी संसाधन, दक्ष ऑपरेटर और उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना होगा। केवल नीतियां बनाकर काम नहीं चलेगा। जब तक यह विभाजन नीति वापस नहीं ली जाती, हड़ताल जारी रहेगी। हालांकि आपदा की स्थिति में अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।
नवीन नियुक्त नायब तहसीलदार हड़ताल से बाहर
रतलाम में जो नायब तहसीलदार प्रशिक्षण काल में हैं, उन्हें हड़ताल से बाहर रखा गया है। बाजना तहसीलदार मनीष जैन ने कहा कि ज्ञापन में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि परिवीक्षा अवधि के अधिकारी इस आंदोलन में शामिल नहीं होंगे। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की है, लेकिन कार्यों पर उसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
प्रदर्शन में प्रमुख चेहरे
इस आंदोलन में नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय, मनोज चौहान, पटवारी संघ से लक्ष्मीनारायण पाटीदार और अधिवक्ता सतीश पुरोहित जैसे प्रमुख अधिकारी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की।
आंदोलन की मांगें और भविष्य की रणनीति
अधिकारियों की मुख्य मांग है कि न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों का विभाजन रद्द किया जाए और प्रशासनिक निर्णयों में ग्राउंड लेवल की सच्चाई को समझते हुए नीति बनाई जाए। अगर जल्द ही कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है।
इस हड़ताल ने प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है और यह सरकार के लिए एक चुनौती बन गई है कि वह किस तरह इस मसले का समाधान निकालती है।
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