
रीवा सोहागी घाट हादसे: रीवा के सोहागी घाट में पिछले 6 वर्षों में 450 से ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। आइए जानते हैं इन दर्दनाक घटनाओं के पीछे की 4 प्रमुख वजहें और प्रशासन की तैयारी।
रीवा के सोहागी घाट पर जानलेवा हादसों की दास्तान
रीवा जिले में स्थित सोहागी घाट मध्य प्रदेश का एक ऐसा क्षेत्र बन चुका है जिसे अब लोग ‘डेथ वैली’ के नाम से जानने लगे हैं। बीते छह वर्षों में इस घाट पर 450 से अधिक सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें 100 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
4 जून 2025 को एक ऐसा ही हृदयविदारक हादसा हुआ जिसमें एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। प्रयागराज से लौट रहे इन यात्रियों की गाड़ी पर ट्रॉला पलट गया और पूरा परिवार समाप्त हो गया।
4 जून 2025 का दर्दनाक हादसा
तारीख थी 4 जून 2025, जब प्रयागराज से रीवा लौट रहे एक परिवार की ऑटो पर सोहागी घाट में एक ट्रॉला पलट गया। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई और मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए परिवार में कोई नहीं बचा।
यह घटना अकेली नहीं है। ऐसे सैकड़ों परिवार हैं, जिन्होंने इसी घाट में अपनों को खोया है।
क्यों बन गया है सोहागी घाट ‘डेथ वैली’?
भास्कर की पड़ताल और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों की राय के आधार पर हम आपको बताते हैं 4 प्रमुख कारण, जिनकी वजह से यह घाट हादसों का केंद्र बना हुआ है।
1. खतरनाक ढलान (Steep Gradient)
डॉ. राकेश मेहर (असिस्टेंट प्रोफेसर, सम्राट अशोक टेक्निकल इंस्टीट्यूट) के अनुसार, सोहागी घाट की ढलान -0.40% से 5.99% तक है, जबकि किसी भी नेशनल हाईवे पर अधिकतम ढलान 6% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
तेज ढलान के कारण:
- वाहनों की ब्रेकिंग एफिशिएंसी कम हो जाती है।
- गाड़ियों के ब्रेक फेल होने की घटनाएं आम हो गई हैं।
- एक्सीडेंट का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
2. कम टर्निंग रेडियस और ब्लाइंड टर्न्स
इस घाटी में कई खतरनाक ब्लाइंड टर्न्स हैं:
- Point A: अड़गड़नाथ मंदिर के पास S शेप का ब्लाइंड टर्न।

- Point B: तीखा राइट कर्व जहां गाड़ियों के ब्रेक अक्सर फेल होते हैं।

- Point C: U शेप का टर्न जो सबसे अधिक ढलान वाला और खतरनाक है।
टर्निंग रेडियस सिर्फ 100-150 मीटर है जबकि IRC गाइडलाइन के अनुसार यह कम से कम 250 मीटर होना चाहिए।
3. खराब विजिबिलिटी और सड़क की स्थिति
- रात के समय प्रकाश की कमी।
- चेतावनी बोर्ड नहीं लगे हैं।
- ओवरलोड वाहनों के चलते सड़क पर गड्ढे और नालियां बन गई हैं।
- इससे गाड़ी का संतुलन बिगड़ता है और हादसे होते हैं।
4. मानव त्रुटि (Human Error)
- तेज रफ्तार में वाहन चलाना।
- ट्रक और बसों का ओवरलोड होना।
- वाहनों का खराब रखरखाव।
- सड़क किनारे गलत तरीके से वाहन खड़ा करना।
- ड्राइवर की नींद में गाड़ी चलाना।
इन सभी कारणों से प्रतिदिन एक से अधिक घटनाएं यहां होती हैं।
जानिए बीते वर्षों के कुछ बड़े हादसे
◾ ट्रॉला पलटने से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत
4 जून 2025 को हुए इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। एक ही गांव में सात चिताएं जलीं, जिसने सबको झकझोर दिया।
◾ 2022: 15 मजदूरों की मौत, 35 घायल
22 अक्टूबर 2022 को हैदराबाद से गोरखपुर जा रही बस की टक्कर ट्रक से हो गई थी। 15 लोगों की मौत और 35 से अधिक लोग घायल हो गए।
◾ 2020: ट्रक ने 5 टोलकर्मियों को कुचला
2 दिसंबर 2020 को एक बेकाबू ट्रक ने टोल प्लाजा कर्मियों को कुचल दिया था।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
रीवा एसपी विवेक कुमार ने घाट का निरीक्षण कर बताया कि:
- 20 करोड़ रुपए का प्रपोजल बनाकर रोड चौड़ा करने का प्रस्ताव।
- घाट के आरंभ में ही रोड सेफ्टी बोर्ड और चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं।
- 24 घंटे अनाउंसमेंट सिस्टम चालू है जिससे लोगों को सतर्क किया जा सके।
स्थानीय लोगों की आवाज़
RTI एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि:
- सड़क की ज्योमेट्री को लेकर बार-बार शिकायतें की गईं।
- मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए।
- लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
- NHAI ने ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं, फिर भी समस्या जस की तस है।
एमपी के अन्य खतरनाक घाट
- गणेश घाट (धार): 400 मीटर का खतरनाक हिस्सा, अब बायपास बनाया गया।
- खूबत घाटी (शिवपुरी): जानलेवा मोड़, अब भी ब्लैक स्पॉट।
- जौरासी घाटी (ग्वालियर): तेज टर्न और खाई, दुर्घटनाएं आम।
- गवाघाटी (AB रोड): रोड संकरी और रोशनी की कमी।
- छुहिया घाटी (रीवा-शहडोल): कई टर्न, अब सुरंग की योजना।
रीवा का सोहागी घाट अब महज एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि सामूहिक शोक का प्रतीक बन चुका है। जब तक इस घाट की रोड ज्योमेट्री और ढलान को वैज्ञानिक तरीके से नहीं सुधारा जाता, तब तक हादसे नहीं रुकेंगे।
जनता, प्रशासन और नीति-निर्माताओं को मिलकर ही इस “डेथ वैली” को “सेफ वैली” में बदलना होगा।
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