

इंदौर: शॉर्ट फिल्म ‘बिस्कुट‘ ने इंदौर की कला, हास्य शैली और पारिवारिक भावनाओं को इंटरनेशनल स्तर पर पहचान दिला दी है। शुक्रवार को इसका यूट्यूब प्रीमियर हुआ, जहां दर्शकों ने इस 16 मिनट की कॉमेडी को भरपूर सराहा।
फिल्म की कहानी: अस्पताल से शुरू हुआ प्रेरणा का सफर
इस फिल्म की कहानी दो भाइयों की पारिवारिक स्थिति पर आधारित है, जो अपने पिता के गंभीर बीमार होने पर अस्पताल में मिलते हैं। मालवी भाषा और हास्य शैली के साथ कहानी को बुना गया है। बिस्कुट जैसे सामान्य शब्द से शुरू होकर यह कहानी गहराई तक जाती है।
निर्माण और कलाकार: इंदौर की टीम ने किया कमाल
निर्देशक गौतम जोशी और निर्माता पीयूष चौधरी की इस फिल्म में रोहित तिवारी और क्षितिज पवार की दमदार केमिस्ट्री दर्शकों को गुदगुदाती है। फिल्म की शूटिंग रॉबर्ट नर्सिंग होम, इंदौर में हुई।
टेक्निकल क्वालिटी और एक्सपर्ट टीम
मुंबई और साउथ के एडिटर्स ने मिलकर फिल्म को सिनेमाई अंदाज दिया। हाई-एंड रिकॉर्डिंग गैजेट्स, एडिटिंग सॉफ्टवेयर और साउंड टेक्नीशियन ने इसे फीचर फिल्म की तरह प्रस्तुत किया।
फेस्टिवल और अवॉर्ड्स
- 6 से अधिक इंटरनेशनल फिल्म अवॉर्ड्स
- 10+ फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग
- दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2024 में स्पेशल मेंशन
मालवी भाषा को मिला सम्मान
फिल्म में मालवी भाषा का बखूबी उपयोग किया गया है। पहले चिंता थी कि अंतरराष्ट्रीय दर्शक इसे समझेंगे या नहीं, लेकिन सबटाइटल्स के माध्यम से भाषा और बोली को भी सराहा गया।
निर्माताओं की भविष्य की योजना
पीयूष चौधरी ने बताया कि यह फिल्म उनके लिए एक प्रयोग था, और अब वे फुल स्क्रीन फिल्म की तैयारी कर रहे हैं। यह फिल्म उन्हें आत्मविश्वास देती है कि इंदौर से निकली रचनाएं वैश्विक मंच पर धमाल मचा सकती हैं।
फिल्म के पीछे का सफर
तीन माह में बनी इस शॉर्ट फिल्म के निर्माण में स्थानीय प्रतिभाओं के साथ साथ मेट्रो सिटीज़ के टेक्निशियनों का अनुभव जोड़ा गया। राइटर, डायरेक्टर, कलाकार सभी इंदौर से हैं
यह खबर इंदौर समाचार अनुभाग में भी पढ़ी जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए Dadasaheb Phalke Film Festival की वेबसाइट देखें।
‘बिस्कुट’ सिर्फ एक शॉर्ट फिल्म नहीं, इंदौर के युवाओं की नई सोच और नए प्रयोगों की प्रतीक है, जो अब वैश्विक पहचान बना रही है।
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