
उज्जैन कावड़ यात्रा 2025: उज्जैन में 84 महादेव यात्रा के अंतर्गत कावड़ यात्रा निकाली गई। रामघाट से महाकाल मंदिर तक बोल बम और ओम नमः शिवाय के जयकारों से शहर गूंज उठा।

उज्जैन में गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और शिवभक्ति की अद्भुत झलक देखने को मिली जब उज्जैन कावड़ यात्रा 2025 का आयोजन 84 महादेव यात्रा के अंतर्गत किया गया। यात्रा की शुरुआत प्राचीन रामघाट से हुई और समापन महाकालेश्वर मंदिर के पावन आंगन में हुआ।
शहर गूंजा “बोल बम” और “ओम नमः शिवाय” के नारों से
कावड़ यात्रियों के जयकारों से शहर की गलियों और मुख्य मार्गों में भक्तिमय माहौल बन गया। जगह-जगह फूल बरसाकर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।
शिप्रा नदी में अभिषेक से हुई शुरुआत
प्रातःकाल श्रद्धालुओं ने शिप्रा नदी में डुबकी लगाकर पवित्र जल से शिव अभिषेक किया। आयोजनकर्ता माया राजेश त्रिवेदी मित्र मंडल की ओर से बताया गया कि सुबह शिप्रा पूजन के साथ यात्रा आरंभ हुई।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों की सहभागिता
पूजन में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी, पं. अजय शंकर जोशी, पार्षद सपना सांखला, प्रेमलता रामी, श्रवण शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
पंडितों द्वारा विधिवत पूजन
पूजन कार्यक्रम पं. हर्षवर्धन शास्त्री, पं. श्याम त्रिवेदी, पं. उमेश भट्ट, पं. मनोज दुबे सहित अनेक आचार्यों द्वारा संपन्न कराया गया।
महाकाल को अर्पित किया गया शिप्रा जल
शहर में भ्रमण करते हुए यात्रा महाकाल मंदिर पहुंची, जहां पं. शैलेंद्र शर्मा और पं. आकाश पुजारी द्वारा भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया।
यात्रा का स्वागत हुआ भव्य तरीके से
नगर के प्रमुख मार्गों पर विभिन्न समाज और संस्थाओं ने पुष्पवर्षा एवं जल सेवा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
शिवभक्ति का अनुपम संगम
84 महादेव यात्रा से जुड़ी यह कावड़ यात्रा उज्जैन की धार्मिक विरासत और शिवभक्ति की परंपरा को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।
उज्जैन की कावड़ यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है।
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