
उज्जैन, 24 मई 2025:
उज्जैन के विश्वविख्यात श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार तड़के हुए भस्म आरती दर्शन में भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। भक्तों की भारी भीड़ के बीच इस अलौकिक आयोजन में त्रिपुंड चंदन, रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और पंचामृत से महाकाल का पूजन कर दिव्य श्रृंगार संपन्न हुआ।
क्या है भस्म आरती?
भस्म आरती उज्जैन के महाकाल मंदिर की एक प्राचीन और विशेष पूजा पद्धति है, जिसमें भगवान महाकाल को ताजे भस्म (राख) से श्रृंगारित किया जाता है। यह आरती हर दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में होती है, लेकिन शनिवार की आरती को विशेष माना जाता है।
शनिवार सुबह की भस्म आरती का विशेष आयोजन
तड़के जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्तिवाचन कर पूजन की शुरुआत हुई। इसके बाद घंटे की ध्वनि के साथ भगवान से अनुमति ली गई और गर्भगृह के पट खोले गए। पुजारियों ने भगवान महाकाल का रात्रि श्रृंगार उतारकर उनका पंचामृत अभिषेक किया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों का रस शामिल था।
श्रृंगार में रजत मुकुट और मुण्डमाला
श्रृंगार के दौरान भगवान महाकाल को चंदन, त्रिपुंड, रजत चंद्र मुकुट, रुद्राक्ष की माला, सुगंधित पुष्पमालाएं, और शेषनाग का चांदी का मुकुट अर्पित किया गया। इसके अतिरिक्त भांग, सूखे मेवे और भस्म भी चढ़ाई गई। नंदी बाबा का भी विधिवत पूजन और स्नान किया गया।
भक्तिमय माहौल और श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति
झांझ, मंजीरे और डमरू की ध्वनि के बीच पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण छाया रहा। हजारों श्रद्धालु भस्म आरती के दिव्य दर्शन के लिए तड़के ही मंदिर पहुंच गए। मंदिर में उपस्थित लोगों ने भगवान के दिव्य साकार स्वरूप का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
महा निर्वाणी अखाड़े की भस्म अर्पणा परंपरा
भस्म आरती की विशेषता यह है कि इसमें महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा भगवान को भस्म अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस भस्म अर्पण के साथ ही भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में प्रकट होते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं।
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