
मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को दो अलग-अलग घटनाएं चर्चा का विषय बनीं। एक ओर सिंगरौली में भाजपा विधायक रामनिवास शाह नशामुक्ति कार्यक्रम के दौरान शपथ दिलाते समय जुबान फिसलने के कारण सुर्खियों में रहे, वहीं दूसरी ओर आगर जिले के नलखेड़ा में कांग्रेस विधायक भेरों सिंह परिहार ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर मंच से नाराजगी जाहिर कर दी।

नशामुक्ति शपथ में विधायक से हुई बड़ी चूक
सिंगरौली में आयोजित नशामुक्ति अभियान के कार्यक्रम में भाजपा विधायक रामनिवास शाह विद्यार्थियों को शपथ दिला रहे थे। शपथ पढ़ते समय उन्होंने “मैं जीवन में कभी नशा नहीं करूंगा” की जगह गलती से “मैं जीवन में कभी नशा करूंगा” बोल दिया।
कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं ने तुरंत इस गलती को महसूस किया और उनके चेहरों पर मुस्कान दिखाई दी। वहीं मंच पर मौजूद एक अधिकारी ने तुरंत शपथ को सुधारते हुए “नशा नहीं करूंगा” दोहराया। हालांकि विधायक अपनी गलती से अनजान रहे और शपथ आगे पढ़ते रहे।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कांग्रेस विधायक ने मंच से ही जताई नाराजगी
आगर जिले के नलखेड़ा में आयोजित ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की बैठक के दौरान कांग्रेस विधायक भेरों सिंह परिहार ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित संगठनात्मक बैठक की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। विधायक के अनुसार उन्होंने स्वयं वरिष्ठ नेता अजय सिंह से संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
जीतू पटवारी पर भी साधा निशाना
मंच से संबोधित करते हुए विधायक भेरों सिंह परिहार ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संगठन जिस तरीके से काम कर रहा है, उससे पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। अपने भाषण में उन्होंने जीतू पटवारी की तुलना धृतराष्ट्र से भी की।
भाषण के बाद विधायक अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम छोड़कर चले गए। मीडिया से चर्चा में उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि उनकी विधानसभा में बिना जानकारी के आने वालों का विरोध किया जाएगा।
ट्रेन में आमने-सामने दिखे दोनों प्रदेश अध्यक्ष
इसी बीच दतिया उपचुनाव के प्रचार के लिए जाते समय प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ट्रेन में आमने-सामने बैठे दिखाई दिए। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई।
यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा के बावजूद नेताओं के बीच सामान्य संवाद लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है।
भोपाल में पार्षदों की नाराजगी की चर्चा
राजधानी भोपाल में भी सत्तारूढ़ दल के कुछ पार्षदों की नाराजगी की चर्चाएं सामने आई हैं। चर्चा है कि कुछ पार्षदों ने विकास कार्यों में आ रही दिक्कतों को लेकर महापौर से शिकायत की है। बताया जा रहा है कि अब यह मामला पार्टी संगठन के समक्ष भी उठाया जा सकता है।
निष्कर्ष
एक ओर भाजपा विधायक की जुबान फिसलने का वीडियो चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की अंदरूनी बयानबाजी ने पार्टी संगठन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ ही दतिया उपचुनाव के बीच दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक गतिविधियां लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।
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