उन्होंने बताया कि हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में यह व्यवस्था पहले से लागू है। उनके अनुसार, पुजारियों की जेब में दान रखने की परंपरा गलत संदेश देती है और इससे सनातन धर्म की छवि प्रभावित होती है।

महंत रवींद्र पुरी ने यह भी सुझाव दिया कि मंदिर ट्रस्ट पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य जरूरतों की जिम्मेदारी उठाएं, जिससे उन्हें श्रद्धालुओं से सीधे धन लेने की आवश्यकता न पड़े।
चारधाम मंदिर ट्रस्ट के संचालक एवं महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने भी बड़े मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने और ड्यूटी पर आने-जाने वाले सभी कर्मचारियों की मेटल डिटेक्टर से जांच अनिवार्य करने की बात कही। उनका कहना था कि इससे दान चोरी जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
हाल ही में आगर-मालवा के बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की है। इस घटना के बाद मंदिरों में सुरक्षा और दान प्रबंधन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
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