
किसानों का कहना है कि वर्तमान ई-टोकन व्यवस्था उनकी जरूरतों के अनुरूप काम नहीं कर रही है। पोर्टल पर कई बार आवश्यक खाद उपलब्ध नहीं दिखाई देती, जबकि संबंधित गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद रहता है। इससे किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाती और खेती के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

ज्ञापन में बताया गया कि मक्का की फसल के लिए मुख्य रूप से यूरिया की आवश्यकता होती है, लेकिन पोर्टल पर एनपीके, डीएपी या एसएसपी लेने का विकल्प अनिवार्य रूप से प्रदर्शित होता है। इससे किसानों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप खाद लेने में परेशानी हो रही है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि नजदीकी गोदामों में खाद उपलब्ध होने के बावजूद पोर्टल पर दूर स्थित वितरण केंद्रों का आवंटन किया जाता है। कई किसानों को खाद लेने के लिए 50 से 55 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त समय और परिवहन खर्च बढ़ रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने मांग की कि ई-टोकन सॉफ्टवेयर में तत्काल तकनीकी सुधार किया जाए, 5 से 7 किलोमीटर की परिधि में ही खाद उपलब्ध कराई जाए, आधार कार्ड के स्थान पर किसान आईडी से खाद वितरण की सुविधा दी जाए तथा वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित किए जाने के मद्देनजर दलहन बीज पर 100 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाए।
महासंघ ने कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
📢 हमारे अन्य प्लेटफॉर्म से जुड़ें:
📞 खबरों व विज्ञापन के लिए संपर्क करें:
9977238238, 9977290137




