
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में 300 बिस्तरीय नए जिला चिकित्सालय के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की दिशा में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक देश में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की बजाय सभी के लिए समान व्यवस्था होना समय की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “अगर रामचंद्र एक शादी करता है तो रहीम से भी एक ही शादी की अपेक्षा की जा सकती है। मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें हैं। उनके जीवन में भी कठिनाइयां आती हैं, इसलिए उनके हितों की रक्षा भी जरूरी है।”
एक देश में सभी के लिए समान कानून जरूरी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून होने की व्यवस्था पर पुनर्विचार की जरूरत है। उनका कहना था कि एक देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए, जिससे सभी को समान अधिकार और समान न्याय मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर जल्दबाजी में फैसला नहीं ले रही, बल्कि व्यापक जनसंवाद और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे बढ़ रही है।
समिति ने पूरे प्रदेश से लिए सुझाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति ने मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों और 10 संभागों का दौरा कर नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों से सुझाव लिए हैं।
उन्होंने कहा कि इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद सरकार समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक विधानसभा में लाने की तैयारी कर रही है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “एक देश, एक निशान, एक प्रधान और एक विधान” का विचार आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर उस संकल्प को आगे बढ़ाया और अब मध्य प्रदेश सरकार भी उसी भावना के साथ समान कानून लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।
83.16 करोड़ की लागत से बना 300 बिस्तरीय जिला अस्पताल
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 83.16 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चार मंजिला 300 बिस्तरीय जिला अस्पताल का लोकार्पण किया। यह अस्पताल पश्चिमी इंदौर के लाखों लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
हालांकि अस्पताल का संचालन फिलहाल चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है।
पहले चरण में शुरू होगी 34 बेड की मैटरनिटी विंग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पहले चरण में केवल 34 बिस्तरों वाली प्रसूति (मैटरनिटी) विंग शुरू की जाएगी। मेडिसिन, जनरल सर्जरी, हड्डी रोग, हृदय रोग और अन्य प्रमुख विभाग बाद में शुरू किए जाएंगे।
इसके चलते गंभीर मरीजों को फिलहाल एमवाय अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर रहना होगा।
38 साल बाद मिला नया जिला अस्पताल
धार रोड स्थित पुराना जिला अस्पताल वर्ष 1988 से एक जर्जर भवन में संचालित हो रहा था। बढ़ती आबादी के कारण नए अस्पताल की मांग लंबे समय से की जा रही थी। वर्ष 2005 में प्रस्ताव भेजा गया था, जबकि 2017 में अस्पताल निर्माण को मंजूरी मिली। कई वर्षों की देरी के बाद अब इसका निर्माण पूरा हुआ है।
18 करोड़ से बढ़कर 83 करोड़ पहुंची परियोजना लागत
अस्पताल निर्माण की शुरुआती लागत 18 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन निर्माण में देरी, संशोधित स्वीकृतियों और अतिरिक्त कार्यों के कारण इसकी लागत बढ़कर 83.16 करोड़ रुपये हो गई।
166 अधिकारी-कर्मचारियों की होगी तैनाती
अस्पताल के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 166 अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति की है। इनमें विशेषज्ञ चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर और लैब टेक्नीशियन शामिल हैं। प्रशासनिक तैयारियां पूरी होने के बाद अस्पताल के अन्य विभाग भी शुरू किए जाएंगे।
पश्चिमी इंदौर के लोगों को मिलेगी राहत
नए अस्पताल से चंदन नगर, द्वारकापुरी, नूरानी नगर, सिरपुर, राजेंद्र नगर सहित पश्चिमी इंदौर और आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। फिलहाल गर्भवती महिलाओं को सबसे पहले नई सुविधा का लाभ मिलने लगेगा, जबकि अन्य विभाग शुरू होने के बाद सभी मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी.
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