
मध्यप्रदेश के रतलाम में अलग भील प्रदेश की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। बुधवार को आदिवासी समाज के लोगों ने रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम 42 सूत्रीय ज्ञापन कलेक्ट्रेट में नायब तहसीलदार रामचंद्र पांडेय को सौंपा। इस दौरान समाजजनों ने “जय जौहार का नारा है, भारत देश हमारा है” के नारे लगाए और आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।

संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत अलग भील प्रदेश की मांग
भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने ज्ञापन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर अलग भील प्रदेश राज्य का गठन किया जाए।
मोर्चा का कहना है कि इससे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, भाषा और संवैधानिक अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
ज्ञापन में उठाईं 42 प्रमुख मांगें
आदिवासी समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल की गईं। इनमें प्रमुख रूप से—
- अलग भील प्रदेश राज्य का गठन।
- अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय आदिवासियों को प्राथमिकता।
- भीली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना।
- जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित करना।
- वन संरक्षण कानून-2023 को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू नहीं करना।
- आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना।
केंद्र सरकार से गंभीरता से विचार करने की अपील
भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के प्रदेश संयोजक ध्यानवीर डामोर ने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए अलग भील प्रदेश राज्य का गठन समय की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंदू मईडा, कविता भगोरा, प्रदेश संयोजक दिनेश माल, प्रदेश सह संयोजक मुकेश भाभर, विकास भाभर, विपिसिंह हारी, संजय मेडा, राजकुमार डामोर, महावीर निनामा, सुरेन्द्र निनामा, बद्री निनामा, जस्सू भाई मईडा सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।
FAQ
भील प्रदेश की मांग किसने उठाई?
रतलाम में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा और आदिवासी समाज के लोगों ने अलग भील प्रदेश राज्य के गठन की मांग उठाई।
भील प्रदेश किन क्षेत्रों को मिलाकर बनाने की मांग है?
राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तथा दादरा एवं नगर हवेली के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर भील प्रदेश बनाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कितनी मांगें शामिल हैं?
राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कुल 42 सूत्रीय मांगें शामिल हैं।
प्रमुख मांगें क्या हैं?
अलग भील प्रदेश का गठन, भीली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करना, जल-जंगल-जमीन पर अधिकार और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना प्रमुख मांगों में शामिल हैं।
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