
महापौर ने अपने पत्र में बताया कि श्रावण मास की शाही सवारी देखने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। लेकिन पालकी के आसपास पुजारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अन्य लोगों की अधिक मौजूदगी के कारण श्रद्धालुओं को भगवान की एक झलक तक आसानी से नहीं मिल पाती।

पालकी के चारों ओर सख्त सुरक्षा घेरा बनाने की मांग
महापौर ने सुझाव दिया है कि पुलिस पालकी के चारों ओर चौड़ा और मजबूत सुरक्षा घेरा बनाए, जिससे अनावश्यक लोगों की भीड़ पालकी तक न पहुंच सके। उन्होंने कहा कि सुरक्षा घेरे के भीतर केवल वही लोग रहें, जिनकी धार्मिक या प्रशासनिक दृष्टि से वास्तविक आवश्यकता हो।
केवल चार पुजारियों को मिले अनुमति
प्रस्ताव में कहा गया है कि पालकी के दोनों ओर केवल दो-दो पुजारियों को रहने की अनुमति दी जाए। यही पुजारी पूजा-अर्चना और धार्मिक व्यवस्थाओं का संचालन करें। इनके अलावा किसी अन्य व्यक्ति को पालकी के निकट जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों के लिए अलग स्थान
महापौर ने जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अन्य विशिष्ट नागरिकों के लिए अलग स्थान निर्धारित करने का सुझाव भी दिया है। साथ ही सवारी मार्ग पर ऊंचा व्यू प्वाइंट बनाने की बात कही है, ताकि आम श्रद्धालु बिना किसी बाधा के भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें।
प्रशासन को सौंपा स्केच
मुकेश टटवाल ने अपने सुझावों का एक स्केच तैयार कर प्रशासन को सौंपा है। उनका कहना है कि इस विषय पर पहले भी महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की बैठकों में चर्चा हो चुकी है। इस बार उन्होंने लिखित रूप में विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।
कार्यकाल की अंतिम श्रावण सवारी
महापौर ने कहा कि यह उनके कार्यकाल की अंतिम श्रावण शाही सवारी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनके सुझावों पर विचार करेगा और भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए शाही सवारी की व्यवस्था और अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनाई जाएगी।
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