
डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय शासकीय मेडिकल कॉलेज, रतलाम में संस्थागत एथिक्स समिति (Institutional Ethics Committee) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के संस्थापक एवं पूर्व अधिष्ठाता डॉ. संजय दीक्षित ने की। पूरे दिन चली बैठक में विभिन्न विभागों के 38 अनुसंधान प्रस्तावों और पीजी विद्यार्थियों की थीसिस पर विस्तृत चर्चा के बाद उन्हें नैतिक स्वीकृति प्रदान की गई।

मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर अधिष्ठाता डॉ. अनीता मुथा ने पौधा भेंट कर डॉ. संजय दीक्षित का स्वागत किया। इस अवसर पर समिति के उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. वास्तोष्पति शास्त्री, सचिव डॉ. जगदीश हुंडकारी, सह सचिव डॉ. ध्रुवेन्द्र पाण्डेय, नीरज बरमेचा, डॉ. रंजिता अस्के, डॉ. प्रीति कोरी, डॉ. मोहित कुल्मी, डॉ. स्मृति पाण्डेय सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
अनुसंधान में नैतिक मानकों के पालन पर जोर
अधिष्ठाता डॉ. अनीता मुथा ने कहा कि डॉ. संजय दीक्षित के अध्यक्ष बनने से संस्थागत एथिक्स समिति को नई दिशा मिलेगी और मेडिकल कॉलेज में होने वाले अनुसंधानों की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
अपने संबोधन में डॉ. संजय दीक्षित ने कहा कि सभी शोधकर्ताओं को गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (GCP) और आईसीएमआर एथिकल स्टैंडर्ड्स-2017 के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराना प्रत्येक शोध का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
38 शोध प्रस्तावों पर हुआ विस्तृत मंथन
सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक चली बैठक में मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, कम्युनिटी मेडिसिन, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, एनेस्थीसिया, फॉरेंसिक मेडिसिन सहित अन्य विभागों के फैकल्टी, सीनियर रेजिडेंट्स और पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों के 38 अनुसंधान प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने सभी शोध कार्यों में नैतिक मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया।
संस्थागत एथिक्स समिति मेडिकल कॉलेज में संचालित सभी अनुसंधानों, क्लीनिकल स्टडी और विद्यार्थियों की थीसिस की नैतिक समीक्षा करती है, ताकि मरीजों के हितों और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान में किया पौधारोपण
बैठक के बाद डॉ. संजय दीक्षित ने मेडिकल कॉलेज परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण किया। इस दौरान अधिष्ठाता डॉ. अनीता मुथा, अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा, डॉ. प्रफुल्ल सोनगरा, प्रो. डॉ. वास्तोष्पति शास्त्री, नीरज बरमेचा और गोविंद काकाणी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के निर्माण का संकल्प लिया।
200 से अधिक अनुसंधानों को मिल चुकी है स्वीकृति
संस्थागत एथिक्स समिति अब तक 200 से अधिक अनुसंधान प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर चुकी है। समिति का उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान में पारदर्शिता, नैतिकता और मरीजों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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